30 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी, अरावली की वैज्ञानिक परिभाषा तय करने और पर्यावरणीय नुकसान की जांच करेगी

जयपुर। देश की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में शामिल अरावली के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अरावली पर्वतमाला की परिभाषा तय करने तथा उससे जुड़े पर्यावरणीय और पारिस्थितिकीय मुद्दों की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी का गठन किया है। इस निर्णय का राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वागत करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अरावली की परिभाषा और संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई पावर कमेटी का गठन स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कमेटी अरावली के इकोसिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक आधार पर स्पष्ट और प्रभावी परिभाषा तैयार करेगी।
गहलोत ने कहा कि वर्तमान समय में राजस्थान सहित पूरा देश भीषण गर्मी और बदलती जलवायु परिस्थितियों का सामना कर रहा है। ऐसे में अरावली पर्वतमाला का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि एक-दो दशक पुराने मापदंड आज की गंभीर जलवायु चुनौतियों के अनुरूप नहीं हो सकते, इसलिए कमेटी को वर्तमान पर्यावरणीय संकट को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।
पर्यावरणविदों और नागरिकों से सुझाव देने की अपील
अशोक गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार की कुछ नीतियों के कारण अरावली के अस्तित्व पर संकट गहराया था, जिसके बाद “अरावली बचाओ” अभियान को मजबूती मिली। उन्होंने विश्वास जताया कि कमेटी के प्रयासों से अरावली क्षेत्र की लघु पहाड़ियों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित होगा तथा यह प्राकृतिक सुरक्षा कवच और अधिक मजबूत बनेगा।
उन्होंने पर्यावरणविदों, स्थानीय समुदायों, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि जब भी कमेटी सुझाव आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू करे, तब सभी लोग अपने बहुमूल्य सुझाव अवश्य प्रस्तुत करें, ताकि अरावली संरक्षण के लिए व्यापक और प्रभावी नीति बनाई जा सके।
30 अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट को देनी होगी रिपोर्ट
जानकारी के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी के गठन का आदेश दिया है। कमेटी को अरावली पर्वतमाला की सीमा, परिभाषा, संरक्षण उपायों तथा क्षेत्र में हो रही अवैध गतिविधियों की जांच कर 30 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को निर्धारित की गई है।

पहाड़ों की कटाई और अवैध खनन पर लगेगी लगाम
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय अरावली क्षेत्र में पहाड़ों की कटाई, अनियंत्रित खनन और पर्यावरणीय क्षरण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अरावली पर्वतमाला राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात के बड़े भूभाग को प्रभावित करती है तथा यह क्षेत्र के जल स्रोतों, वन्यजीवों और जलवायु संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि कमेटी की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो अरावली के संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र में बढ़ते पर्यावरणीय संकट को कम करने में भी मदद मिलेगी।

Leave a Reply