“मित्रता हो तो कृष्ण-सुदामा जैसी, जिसमें स्वार्थ का कोई स्थान न हो” — बाल व्यास अक्षय अनंत गौड़

बावड़ी। कस्बे के केसरिया कंवर महाराज मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर कथा व्यास बाल व्यास अक्षय अनंत गौड़ ने सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए मित्रता के आदर्श स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “मित्रता हो तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी हो, जिसमें किसी प्रकार का स्वार्थ न हो। वर्तमान समय में अधिकांश रिश्ते स्वार्थ से जुड़े दिखाई देते हैं, जबकि सच्ची मित्रता त्याग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक होती है।”
कथा के दौरान बाल व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के 108 विवाहों का भी वर्णन किया तथा भक्ति रस से ओतप्रोत भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों पर उपस्थित मातृशक्ति ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ नृत्य कर भक्ति भाव का प्रदर्शन किया।
कथा प्रभारी हरेंद्र गौड़ ने बताया कि कथा के मध्य महामंडलेश्वर स्वामी कुशाल गिरी महाराज का आगमन हुआ। उनके स्वागत में कार्यकर्ताओं, कामधेनु सैनिकों एवं गौभक्तों ने पुष्पवर्षा कर भव्य अभिनंदन किया। कथा पांडाल में महाराज ने मंच से दानदाताओं एवं गौभक्तों का दुपट्टा एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया तथा गौसेवा एवं धर्म रक्षा के लिए प्रेरित करते हुए गौहितार्थ प्रवचन दिए।
इस अवसर पर जसवंतगढ़ की आर.के. झांकी टीम द्वारा सुदामा चरित्र की आकर्षक एवं दिव्य झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का संचालन अशोक सोनी ने किया।

इस दौरान जालाराम सांखला, बुधराज गेहलोत, मनोहर देवासी, ओमप्रकाश साईं, धनाराम पुजारी, देवाराम बिश्नोई, सुखराम देवासी, मुनाराम सारण (सरपंच), कोजाराम गोदारा, धर्माराम देवड़ा, राधेश्याम सुथार, श्याम छंगानी, बीजाराम सांखला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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