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गंगाणी में PM आवास योजना में बड़े घोटाले के आरोप, पुराने मकान पर स्वीकृत हुआ नया आवास, जांच समिति गठित

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लाभार्थी की मृत्यु के बाद भुगतान होने की आशंका, ग्रामीणों ने लगाया सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी पर मिलीभगत का आरोप

जोधपुर/प्रेमाराम परिहार।प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में पारदर्शिता और पात्र परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन पंचायत समिति बावड़ी की गंगाणी ग्राम पंचायत में इस योजना के तहत बड़े स्तर पर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत में पुराने बने हुए मकानों को नया दर्शाकर लाखों रुपये का भुगतान उठाया गया है।

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जानकारी के अनुसार गंगाणी ग्राम पंचायत में लोहारों के मोहल्ले के पास रहने वाली कमला पत्नी बिरमाराम लोहार को वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास स्वीकृत किया गया था। लाभार्थी आईडी RJ-100053535 तथा स्वीकृति संख्या RJ15010/4/839 के तहत कुल 1.20 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। इसके अलावा मनरेगा के तहत 83 दिवस का रोजगार भी दर्ज किया गया।

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ग्रामीणों का आरोप है कि जिस मकान पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया, वह मकान पहले से ही 25 से 30 वर्ष पुराना बना हुआ था। आरोप है कि केवल बाहरी दीवार पर नया प्लास्टर कर उसे नया निर्माण दर्शाया गया और योजना की राशि का भुगतान उठा लिया गया। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि लाभार्थी कमला का निधन 25 जनवरी 2026 को हो चुका था, इसके बावजूद भुगतान प्रक्रिया पूरी होने से मामले में गंभीर संदेह उत्पन्न हो गया है।

आवेदन से शुरू हुआ पूरा मामला

गांव निवासी भिवगिरी ने स्वयं प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन करने का प्रयास किया था। उनका आरोप है कि ग्राम पंचायत में आवेदन देने पर उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि जिनके पास पहले से मकान है, उन्हें योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता।

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इसके बाद उन्होंने गांव में स्वीकृत आवासों की जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान उन्हें पड़ोस में रहने वाली कमला पत्नी बिरमाराम लोहार के नाम स्वीकृत आवास की जानकारी मिली। भिवगिरी का आरोप है कि लाभार्थी के पास पहले से बना हुआ मकान होने के बावजूद योजना का लाभ दिया गया और पुराने मकान को नया दर्शाकर भुगतान प्राप्त किया गया।

आरटीआई से नहीं मिली जानकारी

भिवगिरी ने मामले की जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत आवेदन किया, लेकिन आरोप है कि ग्राम पंचायत की ओर से निर्धारित समय में सूचना उपलब्ध नहीं करवाई गई। इसके बाद उन्होंने राजस्थान संपर्क पोर्टल और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करवाई।

बताया जा रहा है कि शिकायत दो बार निरस्त होने के बाद तीसरी बार प्रकरण संख्या 05263636670516 दर्ज किया गया, जिसमें ग्राम विकास अधिकारी पर प्रधानमंत्री आवास योजना में फर्जीवाड़े के आरोप लगाए गए।

जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित

मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत समिति बावड़ी के विकास अधिकारी संपत गोदारा ने जांच के आदेश जारी किए हैं। जांच के लिए सहायक विकास अधिकारी शंभू दयाल तथा ग्राम विकास अधिकारी ओमप्रकाश सियाग की दो सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति को तीन दिवस में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

पीआरपी न्यूज़ की पड़ताल में क्या मिला?

शिकायत के आधार पर पीआरपी न्यूज़ टीम ने मौके पर पहुंचकर लाभार्थी के मकान का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मकान की बाहरी दीवार पर नया प्लास्टर और प्रधानमंत्री आवास योजना का बोर्ड लगा हुआ मिला, जबकि अंदर का अधिकांश हिस्सा वर्षों पुराना दिखाई दिया।

टीम ने पाया कि मकान की छत पर पुरानी पट्टियां लगी हुई हैं, जो लंबे समय तक चूल्हे के धुएं के कारण काली पड़ चुकी हैं। मकान की दीवारों में कई स्थानों पर दरारें दिखाई दीं तथा अन्य हिस्सों में जर्जर स्थिति स्पष्ट नजर आई। परिसर में पुरानी रसोई के अवशेष और खंडहरनुमा निर्माण भी मौजूद मिला।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मकान वास्तव में नया बनाया गया होता तो उसकी संरचना और निर्माण सामग्री पूरी तरह नई दिखाई देती। ऐसे में केवल एक दीवार पर प्लास्टर कर पूरे मकान को नया निर्माण दर्शाने के आरोपों को बल मिल रहा है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

“कमला पत्नी बिरमाराम लोहार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था तथा उसने स्वयं मकान का निर्माण करवाया है। भुगतान भी उसके स्वयं के खाते में किया गया है। मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।”blank

मूल सिंह, ग्राम विकास अधिकारी, गंगाणी

“पड़ोसियों से जानकारी मिली है कि लाभार्थी ने स्वयं मकान बनाया था। हालांकि उस समय मैं सरपंच नहीं था। वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।”

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जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर

प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला होगा बल्कि पात्र लाभार्थियों के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार माना जाएगा। अब ग्रामीणों सहित पूरे क्षेत्र की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

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