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पतंगों से लेकर तिल-गुड़ तक: सन नियो कलाकारों ने साझा की मकर संक्रांति से जुड़ी खुशियाँ

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उत्तर प्रदेश । आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें, तिल-गुड़ की मिठास और बचपन की प्यारी यादें, मकर संक्रांति वह त्यौहार है, जो दिल के बहुत करीब होता है। इस खास मौके पर सन नियो के कलाकार मेघा रे, भाग्यश्री मिश्रा और गौरी शेलगांवकर ने अपने बचपन की यादें, त्यौहार से जुड़ी परंपराएँ और इस साल के जश्न की झलक साझा की।

दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी शो में दिव्या का किरदार निभा रहीं मेघा रे कहती हैं, “मुझे मकर संक्रांति हमेशा से बहुत पसंद रही है, क्योंकि यह अपने साथ ढेर सारी खुशिया, उम्मीद और अपनों के साथ होने का एहसास कराती है। बचपन में परिवार के साथ पतंग उड़ाना और तिल-गुड़ बाँटना मेरी सबसे प्यारी यादों में शामिल है। इस साल काम की वजह से थोड़ी व्यस्त रहूँगी, लेकिन दिव्या प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी के सेट पर अपनी टीम के साथ मिठाइयाँ बाँटकर अपना त्यौहार ज़रूर मनाऊँगी। संक्रांति मुझे सिखाती है कि नकारात्मकता छोड़कर विश्वास, कृतज्ञता और खुशी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मैं सभी को रंगों से भरी, खुशहाल मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ देती हूँ। यह पर्व आपके जीवन में नई शुरुआत, सफलता, शांति, अच्छी सेहत और ढेर सारी मुस्कान लाए।”

सत्या साची में साची की भूमिका निभा रहीं भाग्यश्री मिश्रा ने कहा, “मकर संक्रांति मुझे इसलिए खास लगती है, क्योंकि यह नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। बचपन की वो यादें आज भी मन को खुश कर देती हैं, यानि रंगीन पतंगें उड़ाना और फिर कटी हुई पतंगों के पीछे पूरे जोश के साथ दौड़ना। वह मस्ती अब सोचने पर और भी खास लगती है। आज हम सब बड़े हो गए हैं और काम की वजह से समय कम मिल पाता है, लेकिन यदि इस साल मौका मिला तो हम ‘सत्या साची’ के सेट पर पतंग जरूर उड़ाएँगे और साथ में कुछ खुशनुमा पल बिताएँगे।”

प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी में घेवर का किरदार निभा रहीं गौरी शेलगांवकर ने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा, “मेरे लिए मकर संक्रांति हमेशा सादगी भरी खुशियों का त्यौहार रही है, जिसमें परिवार के साथ खाना, हँसी-मजाक करना और लोगों को बाँटकर खाने की कला को सीखना। मुझे याद है, बड़े हमें तिल-गुड़ देते हुए कहते थे कि हमेशा मीठा बोलो, सकारात्मक सोचो और खुश रहो। इस साल मैं सादगी से त्यौहार मनाऊँगी, अपने करीबियों को फोन करुँगी और उनके प्यार व सपोर्ट के लिए उन्हें धन्यवाद कहूँगी। साथ ही, मेरी माँ के हाथों से बने तिल के लड्डू ‘प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी’ के सेट पर ले जाकर सबके साथ बाटूँगी। बचपन में अपने पापा के साथ पतंग उड़ाने की यादें आज भी दिल को छू जाती हैं, वह पूरा दिन हमारे साथ पतंग उड़ाते थे।”

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