लाइमस्टोन उद्योग बना देश की आर्थिक रीढ़, हजारों लोगों को रोजगार; मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा औद्योगिक क्षेत्र

जोधपुर/प्रेमाराम परिहार। देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल लाइमस्टोन उद्योग आज राजस्थान के जोधपुर और नागौर जिले की पहचान बन चुका है। विशेष रूप से भोपालगढ़ तहसील का बासनी हरिसिंह गांव भारत के सबसे बड़े लाइमस्टोन प्रोसेसिंग हब के रूप में उभरकर सामने आया है। यहां से तैयार होने वाले विभिन्न उत्पाद देशभर के सीमेंट, स्टील, शुगर, पेपर, केमिकल तथा निर्माण उद्योगों की महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा कर रहे हैं।
जानकारों के अनुसार जोधपुर और नागौर जिले में स्थित बासनी हरिसिंह, ताडावास, भंवड़ा, माणकपुर, भेड़, खींवसर, बोरूंदा तथा पुंदलू क्षेत्र देश के सबसे बड़े लाइमस्टोन उत्पादक क्षेत्रों में गिने जाते हैं। इन क्षेत्रों में खदानों से निकाले गए चूना पत्थर को प्रोसेसिंग यूनिटों तक पहुंचाकर विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

कई उद्योगों की आधारशिला है लाइमस्टोन
लाइमस्टोन से मुख्य रूप से सीमेंट ग्रेड गिट्टी, कली चुना तथा विभिन्न प्रकार के पाउडर उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इनका उपयोग सीमेंट निर्माण, शुगर उद्योग, स्टील उद्योग, पेपर एवं कागज निर्माण, पुट्टी, पेंट, एएसी ईंट, विभिन्न रासायनिक उत्पादों तथा पशु एवं मानव उपयोग की दवाइयों में किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली अनेक वस्तुओं के निर्माण में चुने एवं लाइमस्टोन आधारित उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यही कारण है कि देशभर में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

एक हजार से अधिक यूनिटों का विशाल नेटवर्क
राजस्थान के जोधपुर और नागौर जिले में लगभग 1000 लाइमस्टोन प्रोसेसिंग यूनिट संचालित हो रही हैं। इसके अलावा मध्यप्रदेश के जबलपुर, कर्नाटक तथा हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी लाइमस्टोन आधारित उद्योग कार्यरत हैं। लेकिन उत्पादन और प्रोसेसिंग के मामले में जोधपुर-नागौर क्षेत्र देश में अग्रणी माना जाता है।
सरकार को मिलता है करोड़ों का राजस्व
लाइमस्टोन उद्योग से राज्य और केंद्र सरकार को प्रतिवर्ष भारी राजस्व प्राप्त होता है। उद्योग से जुड़े व्यापारियों के अनुसार इस क्षेत्र से लगभग 500 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व तथा करीब 100 करोड़ रुपये की रॉयल्टी सरकार को प्राप्त होती है। इसके अलावा परिवहन, खनन एवं अन्य सेवाओं से भी सरकार को बड़ी आय होती है।

देश की बड़ी लाइमस्टोन खदानें नागौर क्षेत्र में
नागौर जिले के खींवसर, बैराठल, ताडावास, भंवड़ा, माणकपुर, बैरावास, खोड़वा तथा भेड़ क्षेत्र देश की प्रमुख लाइमस्टोन खदानों में शामिल हैं। इन खदानों से निकाले गए पत्थर को चुनाभट्टों एवं प्रोसेसिंग यूनिटों तक पहुंचाया जाता है, जहां आधुनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
ऐसे तैयार होता है चुना
लाइमस्टोन को खदानों से निकालकर चुनाभट्टों तक पहुंचाया जाता है। यहां विशेष प्रकार की भट्टियों में कोयले की सहायता से चूना पत्थर को उच्च तापमान पर जलाया जाता है। भट्टी में स्थापित विभिन्न फिल्टरों और प्रसंस्करण प्रणालियों के माध्यम से पत्थर को अलग-अलग चरणों में तैयार किया जाता है।
जलने और ठंडा होने के बाद इससे चुना, पाउडर, कली तथा सीमेंट ग्रेड गिट्टी जैसे विभिन्न उत्पाद प्राप्त होते हैं। बाद में इनका उपयोग उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग प्रक्रियाओं में किया जाता है।
हजारों परिवारों की आजीविका का आधार
यह उद्योग रोजगार के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। खनन, खुदाई, लोडिंग, बर्निंग, पैकिंग, परिवहन तथा विपणन सहित विभिन्न कार्यों में हजारों श्रमिक एवं कर्मचारी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इससे क्षेत्र के हजारों परिवारों की आजीविका संचालित होती है।
सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा उद्योग
लाइमस्टोन उद्योग से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि देश के सबसे बड़े उत्पादन क्षेत्र होने के बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव है। कई स्थानों पर सड़कें जर्जर अवस्था में हैं, बिजली आपूर्ति बाधित रहती है तथा पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
व्यापारियों के अनुसार खराब सड़कों के कारण भारी वाहनों का संचालन प्रभावित होता है, जिससे उत्पादन और परिवहन दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। उद्योग जगत ने सरकार से औद्योगिक क्षेत्र में सड़क, बिजली और जल आपूर्ति जैसी आधारभूत सुविधाओं के विकास की मांग की है।

सरकार से विशेष ध्यान की मांग
उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि सरकार इस औद्योगिक क्षेत्र पर विशेष ध्यान देकर आवश्यक सुविधाओं का विस्तार करे तो उत्पादन में वृद्धि होगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य को मिलने वाला राजस्व भी कई गुना बढ़ सकता है। जोधपुर-नागौर का लाइमस्टोन उद्योग न केवल राजस्थान बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।


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