नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक बार फिर गंभीर सैन्य टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र को अस्थिरता की स्थिति में ला खड़ा किया है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि क्षेत्रीय संघर्ष के व्यापक युद्ध में बदलने की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
जानकारी के अनुसार अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमले किए। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की कथित आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई। वहीं, ईरान ने भी पलटवार करते हुए बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागने का दावा किया है।
ईरान के कई क्षेत्रों पर हमले
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी हमलों में ईरान के सिरीक, मिनाब, बांदर अब्बास, केश्म द्वीप और गोरगन सहित कई क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश कर रहे अमेरिकी एफ-16 लड़ाकू विमानों को जवाबी कार्रवाई के जरिए पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया कि समुद्री क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच रातभर तनावपूर्ण गतिविधियां और झड़पें जारी रहीं। ईरान का कहना है कि अमेरिकी हमलों के कारण सिरीक शहर के दो प्रमुख जल भंडारण केंद्र क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे हजारों लोगों की पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है।
वार्ता पर पुनर्विचार की चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इन हमलों के बाद तेहरान अब भविष्य की किसी भी वार्ता को लेकर अपने रुख पर पुनर्विचार करेगा। दूसरी ओर अमेरिका ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में हुई कुछ हमलावर गतिविधियों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। जॉर्डन ने दावा किया कि उसने अपनी सुरक्षा व्यवस्था के तहत ईरान की पांच मिसाइलों को मार गिराया।
ट्रंप का सख्त रुख
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ा बयान देते हुए कहा कि यदि ईरान शांति समझौते के लिए तैयार नहीं होता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका आवश्यक होने पर और अधिक कठोर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए, अन्यथा क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। बताया जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर से जुड़ी एक घटना के बाद अमेरिका का रुख और अधिक आक्रामक हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र में भी गूंजा मामला
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान कभी भी धमकी, दबाव या सैन्य ताकत के आगे झुककर बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्षेत्र में बढ़ते तनाव को रोकने के लिए हस्तक्षेप करने की अपील की।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क क्रूड ऑयल की कीमत 93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की खबर है, जो हाल के महीनों में उल्लेखनीय वृद्धि मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में और उछाल आ सकता है। इसका प्रभाव कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, जबकि ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
स्थिति पर दुनिया की नजरमिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान पर टिकी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम रह सके।


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