इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और हाईटेक कारों के बढ़ते चलन ने चांदी की मांग को पूरी तरह बदल दिया है। अब यह धातु सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में भी इसकी अहम भूमिका बन चुकी है। बीते कुछ महीनों में चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है, और इसके पीछे मुख्य कारण है इंडस्ट्रियल डिमांड में लगातार वृद्धि, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइब्रिड कारों के बढ़ते इस्तेमाल के चलते।
चांदी का बढ़ता इस्तेमाल: गहनों से लेकर कारों तक
चांदी का इस्तेमाल लंबे समय से गहनों और अन्य उपभोक्ता उत्पादों में किया जाता रहा है, लेकिन अब ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में इसके उपयोग ने इसे एक रणनीतिक मेटल बना दिया है। करीब एक सदी पहले, वाहनों में चांदी का इस्तेमाल लाइट और रिफ्लेक्टर जैसे हिस्सों में होता था, लेकिन 2010 के बाद इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के आने से चांदी की मांग में तेजी आई है।
आजकल, कारों में इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स का इस्तेमाल बढ़ चुका है, जिनमें चांदी की अहम भूमिका है। चांदी बिजली का सबसे अच्छा कंडक्टर मानी जाती है, और इसके बिना कारों के इंफोटेनमेंट सिस्टम, एयरबैग, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम जैसे तकनीकी हिस्से ठीक से काम नहीं कर सकते।
कितनी चांदी का इस्तेमाल होती है कारों में?
ब्रोकरेज और इंडस्ट्री से जुड़े अनुमानों के मुताबिक,
- पेट्रोल या डीजल कारों में लगभग 15 से 20 ग्राम चांदी का इस्तेमाल होता है।
- हाइब्रिड कारों में यह 18 से 34 ग्राम तक हो सकता है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में 25 से 50 ग्राम तक चांदी का इस्तेमाल होता है।
इससे यह साफ है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में पारंपरिक गाड़ियों की तुलना में चांदी का इस्तेमाल करीब 70 प्रतिशत तक ज्यादा होता है। यह अंतर आने वाले वर्षों में मांग को और तेज कर सकता है।
चांदी का इस्तेमाल कहां होता है?
कारों में चांदी का इस्तेमाल कई अहम सिस्टम्स में होता है:
- इंफोटेनमेंट सिस्टम
- ABS और एयरबैग सिस्टम
- ECU (इंजन कंट्रोल यूनिट)
- पावर विंडो और सेंट्रल लॉकिंग
- बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम
- पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और चार्जिंग सिस्टम
- हाई-वोल्टेज कनेक्शन
इन सभी सिस्टम्स में तेज और भरोसेमंद इलेक्ट्रिकल कनेक्शन जरूरी होता है, और इसके लिए चांदी आदर्श धातु है।
वैश्विक ऑटो इंडस्ट्री में चांदी की खपत
वैश्विक स्तर पर, ऑटो इंडस्ट्री हर साल करीब 1,700 से 2,500 टन चांदी का इस्तेमाल करती है। 2025 से 2031 के बीच इस खपत में हर साल 3 से 4 प्रतिशत का इज़ाफा हो सकता है, और अनुमान है कि 2031 तक यह खपत 3,000 टन प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है।
क्या दिखते हैं आगे के संकेत?
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में तकनीक का बढ़ता दखल और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ता रुझान यह साफ संकेत देता है कि चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब चांदी को सिर्फ एक कीमती धातु के रूप में नहीं, बल्कि एक आवश्यक इंडस्ट्रियल मेटल के रूप में देखा जा रहा है।
इन सब कारणों से, चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ, इसकी मांग में भी आने वाले समय में वृद्धि हो सकती है।


Leave a Reply