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MiG-29 होगा और घातक, ASRAAM missile से बढ़ेगी भारतीय वायुसेना की ताकत

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भारतीय रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए Indian Air Force अब अपने Mikoyan MiG-29 फाइटर जेट्स को अत्याधुनिक ASRAAM missile से लैस करने जा रही है। इस अपग्रेड से वायुसेना की डॉगफाइट क्षमता और मारक शक्ति में बड़ा इजाफा होगा।

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रक्षा मंत्रालय की मंजूरी और अपग्रेड प्लान

रक्षा मंत्रालय ने 25 मार्च को MiG-29 UPG लड़ाकू विमानों में ASRAAM मिसाइल के इंटीग्रेशन और टेस्टिंग के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस डील में मिसाइल के साथ लॉन्चर, सपोर्ट सिस्टम और एयरक्रू व ग्राउंड स्टाफ की ट्रेनिंग भी शामिल है। यह अपग्रेड भारतीय वायुसेना को आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुसार और सक्षम बनाएगा।

MiG-29 की ताकत में होगा बड़ा इजाफा

वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 55 से अधिक MiG-29 विमान हैं, जिनमें ट्रेनर वेरिएंट भी शामिल हैं। अभी इन विमानों में सोवियत दौर की R-73 missile का इस्तेमाल होता है, जिसकी रेंज केवल 10–15 किमी है।

ASRAAM के शामिल होने से यह रेंज 25 किमी से अधिक हो जाएगी, जिससे दुश्मन को दूर से ही निशाना बनाना संभव होगा।

क्या है ASRAAM मिसाइल?

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ASRAAM (Advanced Short Range Air-to-Air Missile) एक आधुनिक, शॉर्ट-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसे MBDA ने विकसित किया है। इसे पहले ही HAL Tejas और Jaguar जैसे विमानों में शामिल किया जा चुका है।

ASRAAM की खासियतें:

  • 25 किमी से अधिक रेंज
  • Mach 3 से ज्यादा की रफ्तार
  • “Fire and Forget” तकनीक
  • हीट-सीकिंग गाइडेंस सिस्टम
  • उच्च सटीकता के साथ लक्ष्य भेदन

यह मिसाइल लगभग 2.9 मीटर लंबी और 88 किलोग्राम वजन की होती है, जो हाई-एक्सप्लोसिव वॉरहेड ले जाने में सक्षम है।

चीन और पाकिस्तान को मिलेगा जवाब

चीन ने 2015 में PL-10 missile को अपनी वायुसेना में शामिल किया था, जिसे J-10C, J-16 और J-20 जैसे लड़ाकू विमानों पर लगाया गया है। इसकी रेंज 20–30 किमी और स्पीड Mach 4 तक बताई जाती है।

वहीं, पाकिस्तान ने इसके एक्सपोर्ट वर्जन PL-10E को JF-17 Block III में तैनात किया है।

ऐसे में ASRAAM का MiG-29 में इंटीग्रेशन भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में बढ़त दिला सकता है।

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निष्कर्ष

MiG-29 में ASRAAM मिसाइल का शामिल होना भारतीय वायुसेना के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह अपग्रेड न केवल एयर-टू-एयर कॉम्बैट में बढ़त देगा, बल्कि चीन और पाकिस्तान जैसे प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ भारत की हवाई ताकत को भी और मजबूत करेगा।

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