भारतीय शेयर बाजार में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। Securities and Exchange Board of India (SEBI) की आगामी बोर्ड बैठक में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए फंड सेटलमेंट नियमों को आसान बनाने पर विचार किया जाएगा। इस कदम से विदेशी निवेशकों की भारत में वापसी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

क्या है ‘Netting of Funds’ प्रस्ताव?
SEBI के सामने सबसे अहम प्रस्ताव ‘Netting of Funds’ का है। इस नियम के लागू होने के बाद FPIs एक ही दिन में किए गए खरीद और बिक्री के सौदों को अलग-अलग सेटल करने के बजाय नेट आधार पर निपटान कर सकेंगे।
यानी, निवेशक उसी दिन की बिक्री से मिली राशि का उपयोग खरीद की देनदारी चुकाने में कर सकेंगे और उन्हें सिर्फ ‘नेट पेयेबल अमाउंट’ का ही भुगतान करना होगा।
अभी क्या है मौजूदा नियम?
- फिलहाल, FPIs को शेयर बाजार में हर ट्रांजैक्शन का सेटलमेंट ‘ग्रॉस बेसिस’ पर करना होता है।
- खरीद और बिक्री अलग-अलग सेटल होती है
- भले ही सौदे एक ही दिन हुए हों, फिर भी पूरा भुगतान अलग से करना पड़ता है
- इस वजह से निवेशकों को अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ती है और उनकी लागत बढ़ जाती है।
नए नियम से क्या होगा फायदा?
‘Netting of Funds’ लागू होने पर:
- ट्रांजैक्शन लागत कम होगी
- फंडिंग की जरूरत घटेगी
- ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी
- फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा) से जुड़े खर्चों में कमी आएगी
खासकर इंडेक्स रीबैलेंसिंग के दौरान यह बदलाव FPIs के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
विदेशी निवेशकों की वापसी को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को और आकर्षक बनाएगा। इससे पूंजी प्रवाह (Capital Inflow) बढ़ने और शेयर बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।
‘Fit and Proper’ नियमों में भी बदलाव संभव
- FPI नियमों के अलावा, SEBI बोर्ड ‘Fit and Proper Person’ मानदंडों में भी बदलाव पर विचार करेगा।
- अब वाइंडिंग-अप प्रक्रिया शुरू होने को अयोग्यता नहीं माना जाएगा
- केवल अंतिम वाइंडिंग-अप आदेश को ही मानदंड माना जाएगा
यह बदलाव बाजार मध्यस्थों के लिए नियामक ढांचे को अधिक व्यावहारिक बनाने की दिशा में अहम कदम हो सकता है।
अहम बैठक पर नजर
यह बैठक SEBI अध्यक्ष Tuhin Kanta Pandey की अध्यक्षता में होगी, जो 1 मार्च 2025 को पदभार संभालने के बाद उनकी पांचवीं बोर्ड मीटिंग होगी।

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