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बुचेटी धाम शिव महापुराण पंचम दिवस: विपत्ति में सच्चे मित्र और धर्म की पहचान

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जोधपुर। जय अम्बे माँ मंदिर, बुचेटी धाम में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर चल रहे इस भक्ति अनुष्ठान में व्यासपीठ से महाराज कैलाश गिरी ने मित्रता और धैर्य के गूढ़ मर्म पर प्रकाश डाला।blank

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🔹 संकट में अपनों की पहचान

कथा के दौरान महाराज ने रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई—
“धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परखिअहिं चारी”
की विस्तृत व्याख्या करते हुए बताया कि धैर्य, धर्म, मित्र और जीवन साथी—इन चारों की असली परीक्षा विपत्ति के समय ही होती है।

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सुख के समय साथ निभाए, वह सामान्य है, लेकिन जो कठिन परिस्थितियों में ढाल बनकर खड़ा रहे, वही सच्चा मित्र और आत्मीय कहलाता है।

🔹 शिव-पार्वती की मनमोहक झांकी

पंचम दिवस की कथा में भगवान शिव और माता पार्वती की भव्य एवं मनमोहक झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा पंडाल “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा।

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🔹 दूर-दराज से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

कथा की बढ़ती ख्याति के चलते आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं मंदिर पुजारी इस आध्यात्मिक आयोजन में शामिल हुए।
कार्यक्रम में संत  रामदेव  और मुख्य पुजारी  चेतन राम  भाटी ने अतिथियों का स्वागत किया।

भजन संध्या और महाआरती के साथ पंचम दिवस की कथा का समापन हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

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