जोधपुर। बावड़ी क्षेत्र के प्रसिद्ध जय अम्बे माँ मंदिर, बुचेटी धाम में चल रही नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन भक्ति, आस्था और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास कैलाश गिरी महाराज ने भगवान शिव और माता सती के दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

सती विवाह की झांकी बनी मुख्य आकर्षण
कथा के दौरान महाराज ने राजा दक्ष के यहां माता सती के अवतार और भगवान शिव के साथ उनके पावन विवाह का मार्मिक चित्रण किया। मंदिर परिसर में सजाई गई शिव-सती विवाह की जीवंत झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। भजनों की मधुर धुन और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया।
इस अवसर पर उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा कि “बेटी को दहेज नहीं, बल्कि शिक्षा देना सबसे बड़ा उपहार है।”
नवधा भक्ति का बताया महत्व
व्यासपीठ से महाराज ने नवधा भक्ति के गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में समझाते हुए बताया कि भक्त नौ प्रकार की भक्ति के माध्यम से ईश्वर के समीप पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ भक्ति ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।
संतों की गरिमामयी उपस्थिति
इस आध्यात्मिक आयोजन में संत रामदेवऔर मंदिर पुजारी चेतन राम भाटी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कथा के समापन पर महाआरती का आयोजन किया गया और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
आयोजन समिति के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।


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