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गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन तेज: प्रशासन-भाटी वार्ता 3 घंटे बाद भी बेनतीजा, धरनास्थल पर लौटकर किया रात्रि विश्राम

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सोलहवें दिन भी जारी रहा मजदूर आंदोलन, जनसभा के बाद बढ़ा जनसमर्थन

बाड़मेर। जिले के गिरल लिग्नाइट माइंस क्षेत्र में श्रमिकों, ड्राइवरों और स्थानीय ग्रामीणों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुँचता नजर आ रहा है। 19 मई को गिरल (शिव, बाड़मेर) में आयोजित विशाल “मज़दूर आंदोलन जनसभा” के बाद शिव विधायक Ravindra Singh Bhati और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच करीब तीन घंटे तक चली वार्ता किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकी।

लंबी बातचीत के बावजूद श्रमिकों की सभी प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनने के कारण आंदोलन को जारी रखने का निर्णय लिया गया। वार्ता समाप्त होने के बाद विधायक रविन्द्र सिंह भाटी पुनः गिरल धरनास्थल पहुँचे और आंदोलनकारियों के बीच ही रात्रि विश्राम किया।

गौरतलब है कि गिरल लिग्नाइट माइंस में स्थानीय श्रमिकों और ग्रामीणों की मांगों को लेकर चल रहा धरना अब लगातार सोलहवें दिन में प्रवेश कर चुका है। भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आंदोलनकारियों का हौसला लगातार मजबूत दिखाई दे रहा है।

“कुछ मांगों पर अभी भी सहमति बाकी, इसलिए आंदोलन जारी रहेगा” — रविन्द्र सिंह भाटी

वार्ता के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि प्रशासन के साथ कई मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई, लेकिन अभी भी कुछ महत्वपूर्ण मांगों पर अंतिम सहमति बनना बाकी है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक मजदूरों और स्थानीय लोगों की वाजिब मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

भाटी ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि मजदूरों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा,
“कुछ मांगों पर अभी भी सहमति बाकी है, इसलिए आंदोलन जारी रहेगा। जब तक श्रमिक संतुष्ट नहीं होंगे, तब तक हम भी पीछे हटने वाले नहीं हैं।”

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जनसभा के बाद और मजबूत हुआ आंदोलन

19 मई को आयोजित “मज़दूर आंदोलन जनसभा” में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में श्रमिक, किसान, ग्रामीण, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। जनसभा के बाद आंदोलन को और अधिक व्यापक समर्थन मिलता दिखाई दिया।

धरनास्थल पर लगातार लोगों की भीड़ बढ़ रही है और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग आंदोलन के समर्थन में पहुँच रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्षों से श्रमिकों और स्थानीय युवाओं की समस्याओं की अनदेखी की जाती रही, जिसके कारण अब लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आ रहा है।

“मज़दूरों के हकों के लिए किसी भी हद तक जाऊँगा”

धरनास्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि वे मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई को अंतिम परिणाम तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने कहा,
“मज़दूरों के अधिकारों और हकों के लिए मैं किसी भी हद तक जाऊँगा। जिन लोगों ने वर्षों तक मेहनत कर इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया, आज उन्हीं लोगों को अपने अधिकारों के लिए सड़क पर बैठना पड़ रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”

उन्होंने प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों से संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मजदूरों और आमजन की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें

धरने पर बैठे श्रमिकों और ग्रामीणों ने कई प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें —

  • कंपनी द्वारा निकाले गए 100 से अधिक ड्राइवरों और श्रमिकों की पुनर्बहाली
  • सभी कर्मचारियों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू करना
  • स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना
  • श्रमिकों को नियमानुसार वेतन, बोनस और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाना
  • श्रमिक सुरक्षा और श्रम कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना

जैसी मांगें प्रमुख रूप से शामिल हैं।

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लगातार सोलहवें दिन भी धरनास्थल पर डटे रहे भाटी

शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी लगातार सोलह दिनों से आंदोलनकारियों के बीच मौजूद हैं। वे लगातार धरनास्थल पर रात्रि विश्राम कर रहे हैं और श्रमिकों के साथ बैठकर उनकी समस्याएँ सुन रहे हैं।

भीषण गर्मी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद उनका आंदोलन स्थल पर डटे रहना आंदोलनकारियों के लिए बड़ा मनोबल बन चुका है। इससे पहले तेज गर्मी के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टरों को धरनास्थल पर बुलाकर उपचार करना पड़ा था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन नहीं छोड़ा।

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अब पूरे प्रदेश की निगाहें अगले फैसले पर

प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अब पूरे क्षेत्र की निगाहें आगामी रणनीति पर टिकी हुई हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और बड़े स्तर तक ले जाया जा सकता है।

लगातार बढ़ते जनसमर्थन और राजनीतिक-सामाजिक सक्रियता के बीच गिरल लिग्नाइट माइंस का यह आंदोलन अब पूरे राजस्थान में चर्चा का प्रमुख विषय बनता जा रहा है।

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