सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ सोने की कीमतों में गिरावट का दबाव बना हुआ है, वहीं चांदी में कभी तेजी तो कभी गिरावट का रुख दिखाई दे रहा है। निवेशकों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या आने वाले 3 महीनों में सोने का भाव 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे जा सकता है।

इंटरनेशनल मार्केट से मिले मिलेजुले संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजार COMEX से मिले संकेतों के अनुसार सोने में गिरावट का रुख देखा जा रहा है, जबकि चांदी में हल्की मजबूती बनी हुई है।
इसके साथ ही US Dollar Index में तेजी देखने को मिल रही है। डॉलर के मजबूत होने से आमतौर पर सोने की कीमतों पर दबाव बनता है, क्योंकि इससे सोना अन्य मुद्राओं में महंगा हो जाता है।
घरेलू बाजार में भी मिला जुला कारोबार
अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख की तरह भारतीय कमोडिटी बाजार Multi Commodity Exchange (MCX) में भी सोने में गिरावट और चांदी में उतार-चढ़ाव देखा गया।
सुबह के कारोबार में सोने की कीमतों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमतों में भी सीमित दायरे में कारोबार होता रहा।
चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज
कमजोर हाजिर मांग और कारोबारियों द्वारा सौदों का आकार घटाने के कारण बुधवार को वायदा कारोबार में चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
मई महीने में डिलीवरी वाले चांदी के वायदा अनुबंध की कीमत 567 रुपये यानी 0.22 प्रतिशत घटकर 2,52,183 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मांग में कमी और मुनाफावसूली के कारण यह गिरावट देखी गई है।
क्या 3 महीने में 1 लाख से नीचे जाएगा सोना?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों की दिशा कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी, जिनमें शामिल हैं:
- डॉलर इंडेक्स की मजबूती या कमजोरी
- वैश्विक ब्याज दरों में बदलाव
- भू-राजनीतिक तनाव
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की मांग
यदि डॉलर मजबूत बना रहता है और वैश्विक बाजार में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि अचानक वैश्विक तनाव या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर सोना फिर से तेजी पकड़ सकता है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए और बाजार की चाल पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना अब भी सुरक्षित निवेश माना जाता है, जबकि अल्पकालिक निवेश में जोखिम अधिक रह सकता है।

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