मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और जंग के बीच एयरलाइन कंपनी इंडिगो ने फ्लाइट टिकट महंगे करने का फैसला किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 20 मार्च 2026 से सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 425 रुपये से लेकर 2,300 रुपये तक अतिरिक्त फ्यूल चार्ज लिया जाएगा। इंडिगो के मुताबिक एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण यह कदम उठाया गया है।

हवाई सफर हुआ महंगा! इंडिगो 20 मार्च से वसूलेगी नया फ्यूल चार्ज
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब विमानन क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। देश की प्रमुख एयरलाइन कंपनी इंडिगो (IndiGo) ने फ्लाइट टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। एयरलाइन ने घोषणा की है कि 20 मार्च 2026 से वह अपनी सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों पर अतिरिक्त फ्यूल चार्ज वसूलेगी। यह शुल्क 425 रुपये से लेकर 2,300 रुपये तक होगा। कंपनी के इस फैसले के बाद हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को पहले की तुलना में ज्यादा किराया देना पड़ेगा।
इंडिगो ने बताया कि विमानन ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण यह कदम उठाया गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और संघर्ष की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर एविएशन फ्यूल की कीमतों पर पड़ा है। इसी वजह से एयरलाइन ने यात्रियों से अतिरिक्त ईंधन शुल्क लेने का फैसला किया है।
कितना बढ़ेगा किराया?
एयरलाइन के मुताबिक अलग-अलग रूट और दूरी के हिसाब से फ्यूल चार्ज तय किया गया है। घरेलू उड़ानों और भारतीय उपमहाद्वीप के भीतर संचालित उड़ानों पर यात्रियों को 425 रुपये का फ्यूल चार्ज देना होगा। वहीं पश्चिम एशिया जाने वाली उड़ानों के लिए यह शुल्क 900 रुपये निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कुछ अन्य सेक्टरों के लिए फ्यूल चार्ज 1,800 रुपये रखा गया है। वहीं यूरोप जाने वाली लंबी दूरी की उड़ानों के लिए यात्रियों को 2,300 रुपये तक का ईंधन शुल्क देना होगा। इस नए शुल्क के लागू होने के बाद यात्रियों के लिए कुल टिकट कीमत में बढ़ोतरी हो जाएगी।

कंपनी ने क्या कहा?
इंडिगो ने अपने बयान में कहा कि एयरलाइन के संचालन खर्च में विमानन ईंधन की हिस्सेदारी काफी ज्यादा होती है। आमतौर पर किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर खर्च होता है। ऐसे में जब ईंधन की कीमतों में तेजी आती है तो इसका सीधा असर एयरलाइनों की लागत पर पड़ता है।
कंपनी ने यह भी कहा कि अगर ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों का पूरा असर टिकट किराए में जोड़ दिया जाता, तो यात्रियों को कहीं ज्यादा किराया देना पड़ता। इसलिए यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ कम रखने के लिए सीमित फ्यूल चार्ज लगाने का फैसला किया गया है।
क्या होता है ATF?
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) को आमतौर पर जेट फ्यूल भी कहा जाता है। यह अत्यधिक शुद्ध केरोसिन आधारित पेट्रोलियम उत्पाद होता है, जिसका इस्तेमाल विमानों को उड़ाने के लिए किया जाता है। इसकी कीमतों में बदलाव का सीधा असर एयरलाइनों के संचालन खर्च और टिकट की कीमतों पर पड़ता है

अन्य एयरलाइनों ने भी बढ़ाए दाम
गौरतलब है कि इंडिगो से पहले एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस भी टिकटों पर फ्यूल चार्ज लगाने का ऐलान कर चुकी हैं। इन एयरलाइनों ने 10 मार्च को ही ईंधन शुल्क लागू करने की घोषणा की थी। ऐसे में अब देश की कई प्रमुख एयरलाइनों में हवाई सफर पहले की तुलना में महंगा हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एविएशन फ्यूल की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रहती है, तो आने वाले समय में हवाई यात्रा और महंगी हो सकती है। इसलिए यात्रियों को टिकट बुकिंग के समय बढ़े हुए किराए का ध्यान रखना होगा।

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