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1100 वर्षों तक भूगर्भ में विराजित दिव्य प्रतिमाएं अब भव्य जिनालय में होंगी विराजमान

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नई राज्यास में 18 मई को ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, 2 करोड़ की लागत से बना दिव्य दिगम्बर जैन मंदिर बनेगा आस्था का नया केंद्र

शाहपुरा/नई राज्यास।नई राज्यास गांव इन दिनों जैन धर्म की आस्था, श्रद्धा और चमत्कारिक इतिहास का केंद्र बना हुआ है। गांव की पावन धरा पर 17 और 18 मई को वह ऐतिहासिक क्षण आने जा रहा है, जब लगभग 1100 वर्षों तक भूगर्भ में विराजित रही दिव्य जैन प्रतिमाएं भव्य दिगम्बर जिनालय में विधि-विधान के साथ विराजमान होंगी। इस ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और भक्ति का माहौल बना हुआ है।

नई राज्यास के गोदा परिवार द्वारा संयुक्त रूप से करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित यह भव्य जिनालय विशेष पाषाण शैली में तैयार किया गया है। मंदिर का निर्माण वियतनाम के सफेद पत्थर एवं बंशीपुर पहाड़ के विशेष पाषाणों से किया गया है। मंदिर की विशाल शिखर शैली, अद्भुत नक्काशी और दिव्य स्थापत्य श्रद्धालुओं को पहली नजर में ही आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं।

धनोप की मिट्टी से वर्ष 2001 में निकली थीं प्राचीन प्रतिमाएं

गोदा परिवार के कमल गोदा एवं राजकुमार गोदा ने बताया कि वर्ष 2001 में धनोप क्षेत्र में नदी की सामान्य खुदाई के दौरान अचानक प्राचीन दिगम्बर जैन प्रतिमाएं निकलनी शुरू हुईं। खुदाई में भगवान आदिनाथ, पारसनाथ भगवान एवं नंदीश्वर द्वीप सहित कई दिव्य प्रतिमाएं प्राप्त हुईं।
इन प्रतिमाओं को देखकर मौके पर मौजूद लोग स्तब्ध रह गए और श्रद्धालुओं ने इसे धर्म का चमत्कार माना।blank

सूचना मिलते ही नई राज्यास से गोदा परिवार धनोप पहुंचा और पूरे श्रद्धाभाव के साथ इन प्रतिमाओं को गांव लेकर आया। इसके बाद 23 मई 2001 को गांव के छोटे मंदिर में प्रतिमाओं की वेदी प्रतिष्ठा की गई। वर्षों तक श्रद्धालु उसी छोटे मंदिर में भगवान के दर्शन करते रहे।

जीर्ण-शीर्ण मंदिर से भव्य जिनालय तक का सफर

समय बीतने के साथ पुराना मंदिर जीर्ण-शीर्ण होने लगा। तब गोदा परिवार ने संकल्प लिया कि इन चमत्कारिक प्रतिमाओं के लिए ऐसा भव्य जिनालय बनाया जाए, जो आने वाली पीढ़ियों तक धर्म और संस्कृति की पहचान बने।

5 फरवरी 2022 को मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर महाराज के सानिध्य में मंदिर की पावन नींव रखी गई। शिलान्यास एवं शिल्पाभ्यास कार्यक्रम के बाद मंदिर निर्माण कार्य निरंतर चलता रहा और श्रद्धा धीरे-धीरे पत्थरों में आकार लेती गई। आज मंदिर अपनी भव्यता, विशाल शिखरों और कलात्मक निर्माण के कारण क्षेत्रभर में आकर्षण का केंद्र बन चुका है।

स्वर्ण आभा से आलोकित होगा गर्भगृह

मंदिर के गर्भगृह को विशेष स्वर्ण आभा से सजाया गया है। यहां भगवान महावीर स्वामी की मुख्य वेदी स्थापित की जाएगी। साथ ही भगवान आदिनाथ, पारसनाथ भगवान, नंदीश्वर द्वीप, मुनि सुदृढ़नाथ सहित कुल 9 देवताओं की धातु एवं पाषाण निर्मित प्रतिमाएं विराजमान होंगी।

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रात्रि के समय मंदिर की रोशनी पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक प्रकाश बिखेरती नजर आएगी। श्रद्धालुओं का मानना है कि आने वाले समय में यह जिनालय क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक तीर्थ बनेगा।

धर्मनगरी में बदलेगा गांव, निकलेगी भव्य शोभायात्रा

17 एवं 18 मई को पूरे नई राज्यास गांव को विद्युत सजावट, धर्मध्वजाओं एवं रंग-बिरंगी झांकियों से सजाया जाएगा। गांव की गलियों से लेकर मंदिर परिसर तक भक्तिमय वातावरण दिखाई देगा।

महोत्सव के दौरान बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में भगवान की भक्ति में लीन नजर आएंगे। इसके अलावा धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा तथा विशाल सामूहिक प्रसादी एवं वात्सल्य भोज भी रखा जाएगा।

देशभर से पहुंचेंगे संत और विशिष्ट अतिथि

यह ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य  108 विद्यासागर महाराज के आशीर्वाद, मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर महाराज के मार्गदर्शन एवं प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के सानिध्य में सम्पन्न होगा।

कार्यक्रम में शाहपुरा-बनेड़ा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा, अजमेर के पूर्व जिला प्रमुख पूखराज पहाड़िया, ग्राम सरपंच सत्यानारायण भील सहित कई जनप्रतिनिधि एवं विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।

इसके अलावा वेद स्टोनेक्स किशनगढ़ के दिलीप कुमार वेद, निरंजन वेद, निर्मल वेद, प्रमोद वेद, देशनोदय दिगम्बर अतिशय क्षेत्र चांवलेश्वर पार्श्वनाथ के अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र कासलीवाल तथा सर्वार्थ सिद्ध अतिशय क्षेत्र रणथम्भौर, सवाई माधोपुर के तरुण बंज भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

समाज की श्रद्धा और एकता का प्रतीक बना जिनालय

श्री दिगम्बर जैन मंदिर के संरक्षक रतनलाल गोधा एवं अध्यक्ष भागचन्द गोधा, राजकुमार गोधा, कमल गोधा तथा शशि गोधा ने बताया कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि समाज की एकता, श्रद्धा और समर्पण का जीवंत प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि वर्षों का सपना अब साकार होने जा रहा है और यह जिनालय आने वाली पीढ़ियों को धर्म, संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना की प्रेरणा देता रहेगा। नई राज्यास अब उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है, जहां मिट्टी से निकली दिव्यता पुनः धर्मध्वजा के साथ जगमगाने वाली है।

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