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भिवाड़ी में नाबालिग लड़कियां लापता, बच्चों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

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भिवाड़ी । भिवाड़ी शहर में शुक्रवार शाम एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जिसने न केवल अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दो नाबालिग लड़कियां—13 वर्षीय अनुष्का और वैभवी यादव—जो रोज़ की तरह ट्यूशन जाने के बाद अचानक लापता हो गईं, उनके बारे में अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है।

क्या हुआ था?
आशियाना तरंग सोसाइटी निवासी अनुष्का, जो अपने घर से शाम 4:30 बजे ट्यूशन के लिए निकली थी, के बाद कोई पता नहीं चला। उसकी मां सोनम के मुताबिक, अनुष्का रास्ते में दो छोटे बच्चों को ट्यूशन छोड़ने गई थी, लेकिन फिर वह वापस नहीं लौटी। साथ में वैभवी यादव, जो कैपिटल ग्रीन सोसाइटी में अपनी नानी के साथ रहती है, भी उसी समय से लापता है।

दोनों बच्चियों के घर न लौटने और ट्यूशन शिक्षक के द्वारा उनकी अनुपस्थिति की पुष्टि होने के बाद, परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर तत्काल जांच शुरू की, और सीसीटीवी फुटेज से मामले में नया मोड़ आया।

सीसीटीवी में क्या दिखा?
फुटेज में दोनों बच्चियां सोसाइटी से निकलकर एक ऑटो में बैठती हुई दिखाई दे रही हैं, जो उन्हें भिवाड़ी बस स्टैंड तक ले जाता है। वहां वे स्कूल बैग के साथ एक साथ जाते हुए नजर आईं, लेकिन उसके बाद उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया।

पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज करते हुए भिवाड़ी, तिजारा, टपूकड़ा, तावडू और धारूहेड़ा जैसे आसपास के इलाकों में तलाश शुरू कर दी है। साथ ही अब पंजाब जाने का इनपुट मिलने पर जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है।

समाज को एक बड़ा सवाल:
यह घटना सिर्फ एक पुलिस केस नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी बन गई है। यह सवाल उठता है कि क्या हमारे बच्चों की सुरक्षा सच में सुनिश्चित है? क्या हम सभी अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से निभा रहे हैं? क्या अभिभावक, स्कूल और समाज बच्चों के सुरक्षा, संवाद और निगरानी के मामले में लापरवाह हो गए हैं?

इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा में कोई भी लापरवाही समाज के लिए बहुत महंगी साबित हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि हम सब मिलकर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें, ताकि ऐसी घटनाओं का पुनरावृत्ति न हो।

समाज को जागरूक होने की आवश्यकता
समाज को यह समझने की जरूरत है कि केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों की सुरक्षा में योगदान दें। परिवार और समुदाय दोनों का सहयोग जरूरी है ताकि बच्चों को ऐसे खतरों से बचाया जा सके।

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