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हृदय में राम को धारण करने से सकल क्लेश व जंजाल मिटते है: संत मुरलीधर महाराज

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बावङी। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर बावड़ी के विनायकपुरा भवाद में चल रही नव दिवसीय रामकथा के तृतीय दिवस की कथा में शिव पार्वती का विवाह बड़े धूमधाम से मनाया ओर महाराज ने गोस्वामी तुलसीदास महाराज द्वारा रचित रामचरितमानस के बालकांड में वर्णित मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के अवतार के कारणों व हेतुओं पर प्रकाश डालते हुए भगवान राम के जन्मोत्सव की कथा का रस पान करवाया।
जय विजय, मनु शतरूपा व प्रताप भानु की पूर्व जन्म की कहानी को भगवान के जन्म का कारण बताने के बाद जब महाराज ने
“भए प्रकट कृपाला दीन दयाल कौशल्या हितकारी…” गाया तब श्रोता अति आनंदित होकर झूमने लगे। “अवध में आंनद भयो” पर तो पूरे पांडाल का माहौल देखते ही बनता था। लाला को जन्म सुन आई कौशल्या मैया दे दे बधाई, “मीठो मीठो सरयू जी को पाणी लागे..” “चार चार प्रकटे ललनवा अवध में बाजै बधाईयां”सहित विभिन्न लोक व भक्ति गीतों पर श्रोता मंत्रमुग्ध होकर थिरकने लगे।

 प्रसंग के माध्यम से महाराज ने बताया कि जब इस धरती पर जब ब्राह्मण, धेनु तथा संत दुखी होते हैं तब तब भगवान का अवतार होता है। देवता व मानव राक्षसों के अत्याचार से दुखी होकर भगवान से धरती पर अवतार लेने की प्रार्थना की तब भगवान ने दुष्ट रावण का वध करने तथा धरती को पापों से मुक्त करने हेतु युग परिवर्तन करके भी अवतार लिया। महाराज ने कहा कि जिनके ह्रदय में भगवान है वह व्यक्ति कभी दुखी नहीं हो सकता

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