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सेफ आई, सेफ फ्यूचर” अभियान के तहत 4 हजार से अधिक बच्चों को मिलेंगे चश्मे, कलेक्टर ने पेश की सादगी की मिसाल

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स्कूली बच्चे बने मुख्य अतिथि, कलेक्टर बोले- “आज की अध्यक्षता ये बच्चे ही कर रहे हैं”

डीडवाना। जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक सराहनीय पहल शुरू की गई है, जिसके तहत “सेफ आई, सेफ फ्यूचर” अभियान के माध्यम से उनकी आंखों की सेहत सुधारने के लिए 4,155 बच्चों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए हैं। जिला कलेक्टर डॉ. महेंद्र खड़गावत की पहल से बच्चों के लिए उज्जवल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया है।

सादगी और नवाचार: बच्चों को दिया गया सम्मान
इस भव्य समारोह में कलेक्टर डॉ. महेंद्र खड़गावत ने प्रोटोकॉल तोड़कर बच्चों को विशेष सम्मान दिया। उन्होंने स्वयं दीप प्रज्वलित करने की बजाय यह कार्य स्कूली बच्चों से करवाया। कलेक्टर ने कहा, “आज के इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हम नहीं, बल्कि ये बच्चे कर रहे हैं और यही हमारे मुख्य अतिथि हैं।” इस पहल को चहुंओर सराहा गया और यह बच्चों को सम्मान देने का एक अनूठा तरीका बना।

1.35 लाख बच्चों की हुई स्क्रीनिंग
जिला शिक्षा अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि जिले में कुल 1,35,508 बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग की गई। प्राथमिक जांच में 11,566 बच्चों को ‘लो विजन’ (कम दृष्टि) पाया गया। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने पुनः जांच की और 4,155 बच्चों को चश्मा पहनने के लिए योग्य पाया।

साइबर खतरों पर एसपी की चेतावनी
समारोह में जिला पुलिस अधीक्षक रिचा तोमर ने बच्चों और उनके अभिभावकों को मोबाइल और साइबर सुरक्षा के खतरों के बारे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों की आंखों के लिए तो नुकसानदेह है ही, साथ ही यह उनकी सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।” उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को आउटडोर खेलों और स्वस्थ आहार के लिए प्रोत्साहित करें।

भामाशाहों का महत्वपूर्ण योगदान
सीएमएचओ नरेंद्र चौधरी ने बताया कि यह अभियान पिछले 6-7 महीनों से चल रहा है और इसके तहत जयपुर की ‘देवश्री सोसाइटी’ तथा स्थानीय भामाशाहों ने चश्मे उपलब्ध कराने में योगदान दिया है। प्रथम चरण में डीडवाना, लाडनूँ और मौलासर ब्लॉक के बच्चों को कवर किया गया है, जबकि अगले चरण में कुचामन और मकराना ब्लॉक में शिविर आयोजित किए जाएंगे।

शिक्षा में सुधार की उम्मीद
इस पहल से न केवल बच्चों की दृष्टि में सुधार होगा, बल्कि उनकी पढ़ाई में भी सहारा मिलेगा। जिन बच्चों को बोर्ड पर लिखाई स्पष्ट नहीं दिखाई देती थी, वे अब बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकेंगे और उनके परिणाम बेहतर होंगे। इस कार्यक्रम में नगर परिषद आयुक्त भगवान सिंह और शिक्षा-स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।

“सेफ आई, सेफ फ्यूचर” अभियान को लेकर जिला प्रशासन का यह कदम बच्चों के उज्जवल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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