प्रत्येक प्रकरण का समाधान हो समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और मानवीय दृष्टिकोण से
जोधपुर। जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने सोमवार को आयोजित जिला स्तरीय साप्ताहिक समीक्षा बैठक में अधिकारियों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अधिक दक्षता, उत्तरदायित्व और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी और संवेदनशील बनाना समय की मांग है। प्रत्येक अधिकारी अपने कार्य क्षेत्र में तकनीकी दक्षता के साथ संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करें, जिससे आमजन का विश्वास प्रशासन पर और मजबूत हो।
लंबित प्रकरणों के निस्तारण में लाएं ठोस परिणाम
बैठक में लंबित शिकायतों, विशेषकर जनसुनवाई, मुख्यमंत्री कार्यालय, माननीय जनप्रतिनिधियों के संदर्भ, मानवाधिकार आयोग तथा न्यायालयों से संबंधित अवमानना प्रकरणों की समीक्षा की गई। जिला कलक्टर ने इन मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और दस्तावेजीकृत कार्यवाही के निर्देश देते हुए कहा कि बार-बार की याद दिलाने वाली प्रवृत्ति पर अंकुश लगे, इसके लिए प्रकरणों की सतत मॉनिटरिंग जरूरी है।
विभागीय समन्वय को बनाएं योजनाओं के क्रियान्वयन की आधारशिला
अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव तभी दिखेगा जब विभागों के बीच सशक्त समन्वय होगा। उन्होंने कहा कि योजनाएं केवल कागजों में नहीं, ज़मीन पर दिखाई दें — इसके लिए संबंधित अधिकारी क्षेत्र में जाकर वस्तुस्थिति देखें और रियल टाइम प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
विभिन्न विषयगत बिंदुओं पर समन्वित समीक्षा और दिशा-निर्देश
बैठक में बजट घोषणाओं से संबंधित भूमि आवंटन प्रकरणों, जिला स्तरीय विवाद एवं शिकायत निवारण तंत्र, राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना, अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, नवजीवन योजना, तथा वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की गई।
जिला कलेक्टर ने निर्देश दिए कि भूमि आवंटन से संबंधित सभी बजट घोषणाओं के प्रकरणों का त्वरित परीक्षण कर प्राथमिकता से निस्तारण किया जाए। उन्होंने राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत औद्योगिक निवेश प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय लेने, अनुमति प्रक्रियाओं को सरल बनाने और निवेशकों को एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध राहत प्रदान करने के निर्देश दिए।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए त्वरित एफआईआर, जांच एवं सहायता राशि वितरण सुनिश्चित करने को कहा गया। नवजीवन योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने सामाजिक पुनर्वास कार्यों को और प्रभावी बनाने तथा वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त प्रार्थनापत्रों का संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार मिश्रा, नगर निगम आयुक्त (उत्तर-दक्षिण) सिद्धार्थ पालानीचामी, रजिस्ट्रार पुलिस विश्वविद्यालय एवं अति जिला कलेक्टर (भू प्रबंधन) शिल्पा सिंह, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रथम) जवाहर चौधरी, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (द्वितीय) सुरेन्द्र राजपुरोहित सहित सभी जिला स्तरीय विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।


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