नई दिल्ली । भारत के बॉन्ड बाजार में इस हफ्ते एक मजबूत संदेश गया कि निवेशक उस स्थान पर अपना भरोसा रखते हैं, जहां कारोबार का मूलभूत ढांचा और भविष्य की योजना मजबूत दिखती है। अदाणी ग्रुप की थर्मल पावर कंपनी, अदाणी पावर, ने अब तक का सबसे बड़ा घरेलू बॉन्ड इश्यू पेश किया है, जिसे लेकर म्यूचुअल फंड और बड़े निवेशकों में गहरी दिलचस्पी देखी गई। प्रमुख फंड हाउस जैसे कोटक, निप्पॉन, टाटा, इनवेस्को, आईसीआईसीआई और एक्सिस ने इस इश्यू में निवेश करने के लिए अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है।
निवेशकों का मानना है कि अदाणी पावर का बिजनेस मॉडल मजबूत है, और हालिया घटनाक्रमों का इसके ऑपरेशंस पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है। एक अनाम निवेशक ने कहा, “कंपनी का बुनियादी ढांचा मजबूत है, और मौजूदा परिस्थितियां इसे किसी बड़े नुकसान की ओर नहीं ले जातीं।”
अदाणी पावर इस समय देश में 18 गीगावाट की थर्मल पावर क्षमता संचालित कर रही है, और उसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2032 तक इसे बढ़ाकर 42 गीगावाट तक पहुंचाने का है। यह योजना इस बात का संकेत है कि कंपनी आने वाले वर्षों में बिजली उत्पादन में बड़ी छलांग लगाने वाली है। निवेशकों का मानना है कि कंपनी का इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल, विस्तार की स्पष्ट योजना और तुलनात्मक रूप से मजबूत बैलेंस शीट इसे लंबी अवधि के निवेश के लिए आकर्षक बनाती है।
कंपनी का कर्ज प्रबंधन भी मजबूत है। अदाणी पावर का नेट डेट-टू-ईबीआईटीडीए अनुपात लगभग 1.6 गुना है, जबकि अन्य प्रमुख पावर कंपनियों जैसे एनटीपीसी, जेएसडब्ल्यू एनर्जी और टाटा पावर में यह अनुपात 4 से 5 गुना के बीच है। इसके कारण, बॉन्ड निवेशकों को कंपनी का रिस्क प्रोफाइल अपेक्षाकृत संतुलित और विश्वसनीय नजर आता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले पांच वर्षों में अदाणी पावर की ऑपरेटिंग कमाई तीन गुना से अधिक बढ़ सकती है। मौजूदा समय में कंपनी का ईबीआईटीडीए करीब 21,000 करोड़ रुपये है, और यह वित्त वर्ष 2030 तक 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसके पीछे नई क्षमता जोड़ने की योजना, बेहतर प्लांट एफिशिएंसी और स्थिर मांग जैसे कारक प्रमुख हैं।
दुनियाभर की रेटिंग एजेंसियों जैसे मूडीज़ और फिच ने भी अदाणी समूह की इकाइयों का आउटलुक स्टेबल कर दिया है। फिच ने नवंबर में कहा था कि अमेरिका में चल रही जांचों से जुड़े जोखिम निकट भविष्य में प्रबंधनीय हैं और इसका तात्कालिक असर सीमित रहेगा।
बॉन्ड बाजार के जानकारों का मानना है कि इस इश्यू को मिली मजबूती सिर्फ अदाणी पावर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर में निवेशकों के भरोसे को भी प्रदर्शित करता है। भारत में बिजली की बढ़ती मांग, चाहे वह औद्योगिक, शहरी या ग्रामीण क्षेत्रों में हो, इन स्थापित पावर कंपनियों की भूमिका को और भी अहम बना देती है।
कुल मिलाकर, अदाणी पावर का यह बॉन्ड इश्यू यह संदेश देता है कि बाजार अब सिर्फ शोर की बजाय संख्याओं, क्षमता और भविष्य की योजनाओं पर नजर रखता है।


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