मिडिल ईस्ट में चीन के 270 अरब डॉलर दांव पर, ईरान समर्थन पर क्यों सीमित हो रहे शी जिनपिंग?
भले ही Xi Jinping के नेतृत्व में China, Iran के सबसे बड़े कूटनीतिक सहयोगियों में से एक बना हुआ है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में फैले चीनी निवेश के विशाल नेटवर्क के कारण बीजिंग का तेहरान के प्रति समर्थन अब पहले जितना खुला नहीं दिखाई दे रहा है। मिडिल ईस्ट में चीन के सैकड़ों अरब डॉलर के निवेश ने उसकी रणनीति को काफी संतुलित और सावधान बना दिया है।

महामारी के बाद बढ़ा चीन का निवेश
कोविड महामारी के बाद China ने मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ाया। वैश्विक मंदी से प्रभावित कई चीनी कंपनियों ने इस क्षेत्र में नए अवसर तलाशे। खाड़ी देशों ने भी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और ग्रीन टेक्नोलॉजी, पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में विविधता लाने पर जोर दिया।
इन क्षेत्रों में चीन की तकनीकी और निर्माण क्षमता मजबूत मानी जाती है, जिसका फायदा उठाकर उसने कई बड़े प्रोजेक्ट हासिल किए। साथ ही, Zambia और Sri Lanka जैसे विकासशील देशों द्वारा कर्ज चुकाने में असफल रहने के बाद तेल-समृद्ध खाड़ी देश निवेश के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प बनकर उभरे।
अमेरिका से आगे निकल रहा चीन
चीन की इसी रणनीति के कारण हाल के वर्षों में मिडिल ईस्ट में उसके निवेश और निर्माण कार्यों की रफ्तार दुनिया में सबसे तेज रही है। यह क्षेत्र अब चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना Belt and Road Initiative का एक अहम केंद्र बन चुका है।
आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2023 के बीच बीजिंग ने खाड़ी देशों को वित्तीय सहायता और ऋण देने के मामले में United States को पीछे छोड़ दिया। इस दौरान चीन ने वॉशिंगटन द्वारा दिए गए हर 1 डॉलर के मुकाबले लगभग 2.34 डॉलर का निवेश या ऋण उपलब्ध कराया, जिससे वह क्षेत्र का प्रमुख वित्तीय साझेदार बन गया।
युद्ध से खतरे में चीन की आर्थिक स्थिरता
हालिया तनाव में United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है। इस संघर्ष ने चीन की उस आर्थिक स्थिरता को भी जोखिम में डाल दिया है, जिस पर वह अपने वैश्विक प्रभाव को लगातार बढ़ाने की योजना बना रहा था।
हालांकि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरानी अधिकारियों को अस्थायी युद्धविराम के लिए राजी करने में चीनी अधिकारियों की भूमिका का जिक्र किया है, लेकिन क्षेत्र में स्थायी शांति को लेकर अभी भी कई अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।

क्यों सीमित हो सकता है ईरान को चीन का समर्थन?
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में चीन के बड़े निवेश और आर्थिक हित उसे किसी एक देश के पक्ष में खुलकर खड़े होने से रोक सकते हैं। खाड़ी क्षेत्र में उसकी भारी पूंजी लगी होने के कारण चीन की प्राथमिकता अब क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है, ताकि उसके इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट सुरक्षित रह सकें।
ऐसे में आने वाले समय में चीन की रणनीति संतुलन बनाए रखने की हो सकती है—जहां वह ईरान के साथ संबंध भी बनाए रखे और खाड़ी देशों के साथ अपने आर्थिक हितों को भी सुरक्षित रखे।

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