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शेयर बाजार में गिरावट की आशंका: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच GIFT Nifty कमजोर, इन शेयरों पर रखें नजर

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भारतीय शेयर बाजार में बुधवार की तेजी के बाद गुरुवार को गिरावट की आशंका जताई जा रही है। शुरुआती संकेत GIFT Nifty से मिल रहे हैं, जो सुबह करीब 1.95% यानी 444.50 अंक की गिरावट के साथ 22,406.50 पर कारोबार करता दिखा। इससे साफ है कि आज बाजार की शुरुआत कमजोर हो सकती है।

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मिडिल ईस्ट तनाव से बिगड़ा सेंटीमें

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव ने बाजार की धारणा को नकारात्मक बना दिया है।

 

Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया था कि ईरान ने युद्धविराम की मांग की है, लेकिन तेहरान ने इसे तुरंत खारिज कर दिया और इसे “झूठा” बताया। इस बयानबाजी ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।

बहरीन में अमेजन फैसिलिटी पर हमला

तनाव के बीच Bahrain में Amazon की क्लाउड फैसिलिटी पर हमला भी बड़ा कारण बना है। यह हमला ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की धमकी के बाद हुआ, जिसमें अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की बात कही गई थी।

इस घटनाक्रम से निवेशकों में डर का माहौल बन गया है, जिसका असर आज भारतीय बाजार में देखने को मिल सकता है।

इन शेयरों पर रहेगी नजर

मिडिल ईस्ट तनाव के चलते आईटी और ग्लोबल एक्सपोजर वाली कंपनियों जैसे Microsoft, Apple, IBM, Tesla और Amazon से जुड़े भारतीय स्टॉक्स पर खास नजर रहेगी। इसके अलावा तेल और गैस सेक्टर में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

एलपीजी और ईंधन बाजार का असर

ऊर्जा क्षेत्र में भी दबाव बना हुआ है। पिछले साल एलपीजी पर करीब ₹60,000 करोड़ का घाटा हुआ था, जिसमें सरकार और तेल कंपनियों ने बराबर बोझ उठाया था। इस बार भी स्थिति कुछ ऐसी ही बनी हुई है।

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देश में करीब 33.5 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हैं, जिनमें से 10 करोड़ Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के तहत आते हैं। इन उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर ₹300 की सब्सिडी दी जा रही है, जिससे सरकारी खर्च बढ़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय तुलना और सप्लाई संकट

सरकार के अनुसार, भारत में घरेलू एलपीजी की कीमत दुनिया के कई देशों की तुलना में अभी भी कम है। उदाहरण के लिए, Pakistan, Sri Lanka और Nepal में एलपीजी कीमतें भारत से काफी अधिक हैं।

हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे देश के कुछ हिस्सों में कमी की खबरें भी सामने आई हैं।

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क्या रहेगी आगे की दिशा?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने और ग्लोबल संकेतों पर नजर रखने की जरूरत है।

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