बावड़ी (जोधपुर)। नवरात्रि महोत्सव के पावन अवसर पर मां अम्बे मंदिर धाम, बुचेटी में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्री शिव महापुराण कथा का भव्य समापन रविवार को श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम के साथ हुआ। रुद्राभिषेक, रुद्राष्टकम पाठ, शिव चालीसा एवं विधि-विधान से सम्पन्न हवन-यज्ञ के साथ पूर्णाहुति दी गई। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गया।
कथा व्यास कैलाश गिरी महाराज ने व्यासपीठ से अंतिम दिन पूर्ण आरती की कथा करते हुए रुद्राष्टकम, शिव चालीसा तथा 12 ज्योतिर्लिंगों की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और अवतारों की कथा सुनाकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति में सराबोर कर दिया।

✨ रामनवमी पर विशेष कथा, भक्तों में जागी आस्था
रामनवमी के अवसर पर आयोजित विशेष प्रसंग में महाराज ने भगवान के विभिन्न अवतारों का वर्णन करते हुए भक्ति और धर्म के महत्व को बताया। नौ दिवसीय इस आयोजन में तन-मन-धन से सहयोग करने वाले दानदाताओं को व्यासपीठ से आशीर्वाद प्रदान कर अर्धनारीश्वर की प्रतिमा भेंट की गई।
🎭 ‘नानी बाई का मायरा’ ने बांधा समां
अष्टमी की रात्रि को ‘नानी बाई का मायरा’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। मायरा वाचक कैलाश गिरी महाराज ओस्तरां ने नरसी भगत की अटूट भक्ति का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने सेठ का रूप धारण कर राधा और रुक्मिणी के साथ आकर नानी बाई का मायरा भरा।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मिलकर ₹1,51,000 का मायरा भरकर नानी बाई को चुनरी ओढ़ाई।
🔥 पंचकुंडीय यज्ञ और पूर्णाहुति
कथा पांडाल में पंचकुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें यज्ञाचार्य पंडित जेठाराम जोशी (घेवड़ा) ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं से आहुतियां दिलवाई। पूर्णाहुति के अवसर पर आशुतोष पुरी महाराज (झीलर) एवं गोविंद गिरी महाराज (ओस्तरां) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
🎶 भजन संध्या में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
शाम को आयोजित विशाल भजन संध्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भजन गायकों ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।
“ठुमक ठुमक चाल भवानी…” और “देवी रे देवलिया रम जाए…” जैसे जोशीले भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और पंडाल जयकारों से गूंज उठा।

इस दौरान कैलाश गिरी औस्तरा, कुलदीप चौधरी (अरटीया), दिनेश माली (पीपाड़ शहर) सहित कई प्रसिद्ध भजन गायकों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं।

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