भारतीय मुद्रा में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को रुपया 89 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले 94.85 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ। यह अब तक का सबसे कमजोर स्तर है, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गई है। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में रुपये की कमजोरी साफ देखने को मिल रही है।

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 94.18 प्रति डॉलर पर खुला था, लेकिन दिनभर के कारोबार के दौरान इसमें लगातार गिरावट जारी रही। पहली बार रुपया 94.50 के स्तर को भी पार कर गया और अंत में 94.85 पर बंद हुआ। इससे पहले बुधवार को भी रुपया 20 पैसे गिरकर 93.96 के स्तर पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का रिकॉर्ड निचला स्तर था।
गिरावट की मुख्य वजहें
रुपये में इस बड़ी गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर रुपये पर पड़ता है।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है और रुपया कमजोर हो रहा है।
घरेलू शेयर बाजार में गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी रुपये पर दबाव बना रही है। जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे रुपये की कीमत और गिरती है।
डॉलर इंडेक्स की मजबूती
इस बीच डॉलर इंडेक्स भी मजबूत बना हुआ है और 100 के स्तर पर पहुंच गया है। मजबूत डॉलर का सीधा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर पड़ता है, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है।

आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, खासकर कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव में बढ़ोतरी जारी रही, तो रुपये में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर रहेगी।

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