27 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया। खासतौर पर Sensex और Nifty 50 दोनों प्रमुख सूचकांक 2% से ज्यादा टूटकर बंद हुए।

शुक्रवार को बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला। एक दिन पहले Ram Navami के कारण बाजार बंद था, लेकिन छुट्टी के बाद निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। सप्ताह की शुरुआत में बाजार में तेजी थी, लेकिन Iran से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की अनिश्चितता ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया।
दिन के अंत में सेंसेक्स 1,690 अंकों की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी 486 अंक टूटकर 22,900 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। यह स्तर बाजार के लिए बेहद अहम माना जाता है, और इसके टूटने से आगे और कमजोरी की आशंका बढ़ गई है।
ग्लोबल संकेत भी बाजार के लिए नकारात्मक रहे। अमेरिकी और एशियाई बाजारों में पहले से ही दबाव देखने को मिल रहा था, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। इसके अलावा, कच्चे तेल यानी ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, क्योंकि इससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने का खतरा रहता है।

इस गिरावट के बीच भारतीय मुद्रा भी कमजोर हुई। रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 के पार चला गया, जो एक मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण स्तर है। बुधवार को 93.98 पर बंद होने के बाद, रुपया गिरकर 94.16 पर खुला, जिससे विदेशी निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को सावधानी बरतने और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

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