
बावङी। नवरात्रि महोत्सव के पावन अवसर पर मां अम्बे मंदिर धाम बुचेटी में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। कथा का आयोजन पुजारी चेतनराम एवं नागाबाबा लालपुरी महाराज (जीलर धुणा ओस्तरां) के पावन सानिध्य में किया जा रहा है।
कथा के दौरान कथा व्यास कैलाश गिरी महाराज ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण और ओजस्वी वर्णन करते हुए कहा कि “जो व्यक्ति अपने कल्याण की कामना करता है, उसे विषय वासनाओं से दूर रहना चाहिए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि विषय वासनाओं में डूबा हुआ मनुष्य कभी भी सच्चे सुख और मोक्ष को प्राप्त नहीं कर सकता।
महाराज ने कथा पंडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि हर मनुष्य को सत्कर्म करते हुए भगवान शिव की शरण में जाना चाहिए। भगवान शिव सदैव शरणागत भक्तों की रक्षा करते हैं और भक्त के सम्मान के लिए अपनी तपस्या तक त्याग देते हैं।

गृहस्थ जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्त्री को पतिव्रत धर्म का पालन करना चाहिए और पुरुष को सदैव स्त्री का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि “जिस घर में स्त्री का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है।” इस अवसर पर टेकीश्वर महादेव मंदिर औस्तरा के महंत गोविन्द गिरी महाराज ने भी अपने प्रवचनों में दान-पुण्य, भजन-कीर्तन और धर्म मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
समाजसेवी एवं शिव भक्त रमेश गिरी खींवसर तथा राजस्थान गो ग्राम सेवा संघ एवं मां अम्बे गौशाला जाखण के अध्यक्ष प्रकाश व्यास ने गौ माता की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हर हिन्दू को गाय को केवल मां कहने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसके प्रति मातृत्व जैसा व्यवहार भी करना चाहिए।

कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है और पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है।

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