होलिका दहन को लेकर पिछले कुछ दिनों से ज्योतिषाचार्यों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। तिथि और ग्रहण को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे थे, जिससे आमजन में भी भ्रम की स्थिति बन गई थी। अब इस विषय पर अंतिम निर्णय सामने आ गया है।
ज्योतिषाचार्य पंडित जगदीश सारस्वत के अनुसार फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सोमवार, 2 मार्च 2026 को सायं 5:57 बजे समाप्त हो रही है। इसके पश्चात पूर्णिमा तिथि प्रदोष काल में प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में होलिका दहन करना श्रेष्ठ माना गया है।
उन्होंने बताया कि 2 मार्च 2026 को सायं 6:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक प्रदोष काल रहेगा, जो होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त है। इसलिए इसी समय में होलिका दहन करना उचित और शास्त्र सम्मत रहेगा।
वहीं 3 मार्च 2026 को पूर्णिमा तिथि प्रदोष काल से पूर्व ही समाप्त हो रही है। साथ ही इस दिन चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण काल में होलिका दहन करना शुभ नहीं माना जाता। इस कारण 3 मार्च को होलिका दहन करना उचित नहीं रहेगा।
अतः सभी श्रद्धालु और नागरिक 2 मार्च 2026, सोमवार को प्रदोष काल में ही होलिका दहन करें। यही निर्णय शास्त्रों के अनुरूप और सर्वसम्मत माना गया है।


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