मध्यप्रदेश, जो पहले अपने सांस्कृतिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता था, अब पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ने अपने सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में हो रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर का एक प्रमुख केंद्र मध्यप्रदेश बनकर उभरा है, और यह राज्य अब पर्यटन के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है।
राजस्थान-मध्यप्रदेश का सांस्कृतिक पर्यटन गठबंधन
राजस्थान और मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक निकटता दोनों राज्यों के बीच एक मजबूत हेरिटेज और टूरिज्म सर्किट बनाने में सहायक हो रही है। जयपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, और जोधपुर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों से आने वाले पर्यटकों के लिए मध्यप्रदेश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल जैसे उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मांडू, ओरछा, खजुराहो और चंदेरी अब सुलभ और आकर्षक बन चुके हैं। राज्य में बेहतर सड़क, रेल और वायु कनेक्टिविटी ने इन स्थलों को पर्यटकों के लिए और भी सुलभ बना दिया है।
2024–25 में पर्यटकों की रिकॉर्ड संख्या की उम्मीद
मध्यप्रदेश में 2024–25 तक 14 करोड़ से अधिक पर्यटकों के आगमन की उम्मीद है, जिससे यह राज्य देश में सबसे अधिक पर्यटन वृद्धि दर वाला राज्य बन जाएगा। पिछले दो वर्षों में राज्य को 18 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं, जो प्रदेश की पर्यटन नीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाते हैं।
सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का नया निर्माण
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों को और भी आकर्षक बनाने के लिए 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न परियोजनाओं की शुरुआत की है। इन परियोजनाओं में ओंकारेश्वर में अद्वैत लोक और एकात्म धाम, उज्जैन में महाकाल लोक, महेश्वर में देवी अहिल्या लोक, और ओरछा में श्रीरामराजा लोक जैसे महत्वाकांक्षी प्रकल्प शामिल हैं, जो आध्यात्मिक पर्यटन को नए आयाम दे रहे हैं।
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा
प्रदेश में 400 से अधिक होम-स्टे शुरू किए गए हैं, जो ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ भी पहुंचा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य 1000 होम-स्टे और अन्य पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ ग्रामीण इलाकों में पर्यटन को और प्रोत्साहित करना है।
नई नीतियों और निवेश का स्वागत
प्रदेश सरकार ने पर्यटन नीति–2025 और फिल्म पर्यटन नीति–2025 के तहत निवेशकों और फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके परिणामस्वरूप 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह निवेश मध्यप्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करेगा।
सुरक्षित और विकसित पर्यटन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रदेश की जीडीपी में पर्यटन का योगदान 10 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। इसके लिए 500 नए होटल, 20,000 कमरे, मार्ग सुविधा केंद्र, महिला-आधारित पर्यटन प्रशिक्षण, और सेफ टूरिज्म जैसी योजनाओं पर काम हो रहा है।
राजस्थान और मध्यप्रदेश की साझेदारी
राजस्थान और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक समानताएं, धार्मिक परंपराएं और ऐतिहासिक संपर्क अब पर्यटन के क्षेत्र में एक नई ऊर्जा के साथ सामने आ रहे हैं। यह साझेदारी न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए भी एक समृद्ध, सुरक्षित और अनुभव-प्रधान यात्रा का मार्ग प्रशस्त कर रही है।
मध्यप्रदेश, जो पहले भी अपनी सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध था, अब पर्यटन के क्षेत्र में भी एक प्रमुख स्थल बन चुका है। राजस्थान के साथ मिलकर यह राज्य भारतीय पर्यटन के भविष्य को नई दिशा दे रहा है। अतुल्य भारत का हृदय प्रदेश अब न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र बन चुका है, बल्कि निवेशकों और पर्यटकों के लिए भी एक आदर्श स्थल बन गया है।


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