भिवाड़ी । भिवाड़ी में नवंबर से दिसंबर तक लगातार गिरते वायु गुणवत्ता स्तर ने लाखों लोगों की सेहत को संकट में डाल दिया है। इस दौरान, AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) की स्थिति 300 से 400 के बीच रही, जो गंभीर रूप से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आती है। 2 नवंबर को PM2.5 का स्तर 402 तक पहुंच गया, जो किसी भी औद्योगिक क्षेत्र के लिए आपातकालीन स्थिति को दर्शाता है। हालांकि, प्रशासन द्वारा जुर्माने और कार्रवाई के बावजूद, स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं देखा गया।
इस दौरान, जिला प्रशासन ने विभिन्न उपायों के तहत 9,82,700 रुपये का जुर्माना वसूला, लेकिन बावजूद इसके, हवा में कोई खास सुधार नहीं हुआ। 27 नवंबर से 1 दिसंबर तक प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी गई, जिसमें निर्माण गतिविधियों, कचरा जलाने और अवैध डंपिंग के खिलाफ कार्रवाई की गई। बावजूद इसके, PM2.5 के स्तर में कोई राहत नहीं मिली।
इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर यह है कि प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की अनदेखी और मानकों का पालन न करना अब तक एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। कई औद्योगिक इकाइयों के डीजी सेट सील किए गए, लेकिन इसके बावजूद प्रदूषण की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
उपचारकर्ताओं का कहना है कि लगातार खराब वायु गुणवत्ता बच्चों, बुजुर्गों और सांस, एलर्जी या दिल की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। स्थानीय अस्पतालों में इन बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ी है, और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो इसके दीर्घकालिक प्रभाव होंगे, जो शहर के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करेंगे।
यह रिपोर्ट सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है—बल्कि यह प्रशासन और नागरिकों के लिए एक अलर्ट है। अब समय आ गया है कि भिवाड़ी प्रशासन प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ठोस और निर्णायक कदम उठाए, ताकि इस औद्योगिक शहर की जनता को आने वाले महीनों में राहत मिल सके।
सवाल यही है: क्या भिवाड़ी का प्रशासन प्रदूषण के इस मंजर को रोकने में सच्चे मन से प्रयास करेगा, या यह जहरीली हवा आने वाले समय में और अधिक लोगों को बीमार कर देगी?


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