जोधपुर । बावड़ी क्षेत्र में एक युवक के पास ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर साइबर ठगी का प्रयास किया गया। युवक को एक फर्जी कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए उसे गंभीर ऑनलाइन अपराधों में फंसाने की धमकी दी। कॉलर ने युवक से पैसे की मांग की, लेकिन पीड़ित युवक ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया।
खेड़ापा थाना पुलिस ने इस घटना की जांच शुरू करते हुए बताया कि यह पूरी तरह से एक नया साइबर फ्रॉड है, जिसमें ठग लोग खुद को पुलिस या साइबर अधिकारी बताते हैं और झूठे आरोपों के तहत पीड़ितों को डराकर उनसे पैसे वसूलने का प्रयास करते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नामक कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है और ऐसे मामलों में कोई सरकारी एजेंसी कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे की मांग नहीं करती है।
खेड़ापा थाना के पुलिसकर्मी प्रकाश गोस्वामी ने कहा, “अगर ऐसे फर्जी कॉल्स आएं तो घबराएं नहीं। किसी भी तरह का भुगतान न करें और तुरंत पुलिस को सूचित करें। ऐसे अपराधों से बचने के लिए किसी भी संदिग्ध कॉल की जानकारी स्थानीय थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत दर्ज कराएं।”
पुलिस ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह के साइबर ठगी से सतर्क रहें और अपनी निजी जानकारी, OTP, बैंक डिटेल्स या UPI पिन किसी के साथ साझा न करें।
जनहित संदेश:
साइबर ठगी के मामलों से बचने के लिए पुलिस ने आम नागरिकों और उनके परिवारों से अपील की है कि वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाले ठगियों से सतर्क रहें और ऐसी घटनाओं के बारे में तुरंत पुलिस को सूचित करें।


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