राजस्थान में पंचायतों का पुनर्गठन, चुनाव की तैयारियां तेज
जयपुर: राजस्थान में नए साल के पहले सप्ताह तक पंचायतीराज संस्थाओं के वार्डों का नक्शा बदल जाएगा। प्रदेशभर में पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के वार्डों की सीमाएं फिर से निर्धारित की जा रही हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होगा। इस बदलाव से राजस्थान की ग्राम पंचायतों में करीब 45,000 नए वार्ड बनेंगे, जबकि पंचायत समितियों में भी लगभग 1,000 वार्डों की संख्या बढ़ेगी।
पंचायतों का पुनर्गठन: 45,000 से अधिक नए वार्ड पंचों के पद
राज्य सरकार ने पंचायतों के वार्डों के पुनर्गठन के लिए आदेश जारी किए हैं। इसमें नए मापदंडों के तहत हर ग्राम पंचायत में कम से कम 7 वार्ड होंगे, जबकि पहले यह संख्या 5 हुआ करती थी। साथ ही, प्रदेश में अब तक 3,441 नई ग्राम पंचायतें बनाई जा चुकी हैं, जिससे अब कुल 14,635 ग्राम पंचायतें हो गई हैं।
इसके साथ ही, 85 नई पंचायत समितियां और 8 नई जिला परिषदें भी बनी हैं, जिससे अब राज्य में कुल 450 पंचायत समितियां और 41 जिला परिषदें हो गई हैं। इन सभी संस्थाओं में वार्डों की संख्या बढ़ेगी और वार्डों के पुनर्गठन के लिए एसडीएम और कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं।
नया सिस्टम: जनसंख्या के हिसाब से वार्डों का बढ़ना
राज्य के ग्राम पंचायतों में हर 3,000 की जनसंख्या वाली पंचायत में कम से कम 7 वार्ड होंगे। इसके बाद हर 1,000 की आबादी पर 2 अतिरिक्त वार्ड जोड़े जाएंगे। पंचायत समितियों और जिला परिषदों में भी जनसंख्या के हिसाब से वार्डों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
- ग्राम पंचायतों में 3,000 की जनसंख्या पर 7 वार्ड होंगे, और हर अतिरिक्त 1,000 की जनसंख्या पर 2 और वार्ड जोड़े जाएंगे।
- पंचायत समितियों में 1 लाख की जनसंख्या पर 15 वार्ड रखे जाएंगे, जबकि इससे अधिक जनसंख्या पर हर 15,000 की आबादी पर 2 अतिरिक्त वार्ड जोड़े जाएंगे।
- जिला परिषदों में 4 लाख की जनसंख्या पर 17 वार्ड होंगे और हर 1 लाख की जनसंख्या पर 2 और वार्ड जोड़े जाएंगे।
चुनाव की तारीखें: मार्च और अप्रैल में चुनाव संभव
पंचायतीराज चुनावों की प्रक्रिया मार्च और अप्रैल के बीच पूरी हो सकती है। पहले चरण में पंच-सरपंच के चुनाव होंगे, जबकि पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनाव अप्रैल में आयोजित हो सकते हैं।
वार्डों के पुनर्गठन से चुनाव प्रक्रिया में बदलाव
वार्डों की सीमाएं बदलने से वार्ड नंबरों में भी बदलाव होगा। इसके साथ ही, सभी पंचायतीराज संस्थाओं में वार्डों की संख्या विषम (ऑड नंबर) रखने के आदेश दिए गए हैं। इस पुनर्गठन के बाद चुनावों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, और यह प्रक्रिया राज्य के लोकतंत्र को और सशक्त बनाएगी।


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