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डाइट जोधपुर में बाल साहित्य पर संवाद एवं उपयोगिता के लिए क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण संपन्न

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जोधपुर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) जोधपुर द्वारा “विद्यालयों में उपलब्ध बाल साहित्य पर संवाद एवं उपयोगिता के लिए क्षमता संवर्धन” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें जोधपुर जिले के 22 ब्लॉकों से चयनित पुस्तकालयाध्यक्षों एवं पुस्तकालय प्रभारियों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों में साहित्य एवं बाल साहित्य के प्रति अभिरुचि विकसित करना, विद्यालयों में पुस्तकालयों के प्रभावी संचालन के लिए नवाचारों की जानकारी प्रदान करना तथा विद्यार्थियों में पठन संस्कृति को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ डाइट प्राचार्य डॉ. मंजू शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन एवं स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में पुस्तकालयों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि पढ़ने की आदत व्यक्ति के बौद्धिक एवं भावनात्मक विकास का आधार है।

बाल साहित्य, पठन संस्कृति और नवाचारों पर केंद्रित रहे प्रशिक्षण सत्र
कार्यानुभव प्रभाग के व्याख्याता राकेश व्यास ने बाल साहित्य की भूमिका, पठन संस्कृति के महत्व और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) में पुस्तकालयों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का माध्यम है।”

प्रशिक्षण सत्रों में पठन संस्कृति का विकास, पुस्तकालय की उपयोगिता, पुस्तकालय आधारित गतिविधियाँ एवं साहित्य की आवश्यकता जैसे विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। सत्रों का संचालन डाइट व्याख्याता राकेश व्यास, एसआरजी पुस्तकालय अध्यक्ष रामूराम, सीएमएफ-टाटा दृष्ट से ज़ोनल कोऑर्डिनेटर जगदीश कुमार, रूम टू रीड से प्रोग्राम एसोसिएट गौरव सिंह राठौड़ एवं गणेश टाक द्वारा किया गया।

सक्रिय सहभागिता और नवाचारों से समृद्ध रहा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान समूह गतिविधियाँ, पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन, खेल आधारित शिक्षण एवं सहभागिता आधारित चर्चाओं के माध्यम से प्रतिभागियों को सक्रिय रूप से सम्मिलित किया गया। पुस्तकालय संचालन में नवीन तकनीक, पुस्तक चयन, पुस्तकालय कालांश के उपयोग एवं विद्यार्थियों को पुस्तकालय से जोड़ने की रणनीतियों पर विशेष चर्चा हुई।

प्रतिभागियों ने समूह चर्चा के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए और विद्यालयों में पुस्तकालयों के प्रभावी संचालन हेतु सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायक एवं व्यवहारिक बताया।

विद्यालय पुस्तकालय विद्यार्थियों के सपनों और सृजनशीलता का संसार हैं — प्राचार्य
समापन सत्र में प्राचार्य डॉ. मंजू शर्मा ने कहा कि विद्यालय पुस्तकालय केवल किताबों का भंडार नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों, सृजनशीलता और कल्पनाओं का संसार हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को अपने विद्यालयों में लागू करने का आह्वान किया। साथ ही सभी सहयोगी संस्थाओं एवं प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त किया।

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