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CBSE Result 2026: क्या री-चेकिंग से बढ़ ही जाते हैं बोर्ड एग्जाम के नंबर? सीबीएसई अधिकारी ने सच्चाई साफ-साफ बताई.

CBSE Board Exam 2026 Re-Checking: सीबीएसई रिजल्ट जारी होने के बाद री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया शुरू होती है। इस प्रक्रिया के तहत जो छात्र अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं होते, उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका दोबारा जांच कराने का अवसर मिलता है। री-चेकिंग की पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन कर दी गई है, इसलिए छात्रों को इसके लिए कहीं जाने की आवश्यकता नहीं होती।

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**CBSE Board Exam 2026 Re-Checking:** सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के परिणाम आने के बाद कई छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं होते। ऐसे छात्रों के लिए बोर्ड री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन की सुविधा देता है, ताकि अगर कॉपी जांच में कोई गलती हुई हो तो उसे सुधारा जा सके। अब यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो चुकी है, इसलिए छात्रों को इसके लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

इस साल **सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026** में करीब **50 लाख से अधिक छात्र** शामिल हुए हैं। 10वीं कक्षा की परीक्षाएं **11 मार्च 2026** को समाप्त हो चुकी हैं, जबकि 12वीं कक्षा की परीक्षाएं **10 अप्रैल 2026** तक चलेंगी। परीक्षाएं खत्म होने के बाद कॉपियों की जांच की प्रक्रिया शुरू होगी और फिर बोर्ड रिजल्ट घोषित करेगा। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों को सीमित समय के लिए री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने का मौका दिया जाता है।

हालांकि इस बार बोर्ड 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में **ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM)** प्रणाली लागू करने जा रहा है। इस सिस्टम में कॉपियों की जांच डिजिटल तरीके से की जाती है, जिससे त्रुटियों की संभावना कम हो जाती है। यही वजह है कि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में री-चेकिंग की जरूरत कम पड़ सकती है।

## CBSE बोर्ड में री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया

सीबीएसई के अनुसार कॉपियों की जांच एक तय **स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP)** के तहत की जाती है ताकि मूल्यांकन की गुणवत्ता बनी रहे। इसके बावजूद अगर कोई छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं है तो उसे तीन चरणों में अपनी उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच कराने का विकल्प मिलता है।

री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया आमतौर पर इन तीन स्टेप में होती है:

1. उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त करना
2. अंकों का वेरिफिकेशन
3. री-इवैल्यूएशन या री-चेकिंग

## 1. उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी

री-चेकिंग प्रक्रिया शुरू करने से पहले छात्र को अपनी **उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी** प्राप्त करनी होती है। इसके लिए सीबीएसई के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होता है।

बोर्ड ने इसके लिए **प्रति विषय ₹500 प्रोसेसिंग फीस** तय की है। यह फीस केवल ऑनलाइन माध्यम से ही जमा की जा सकती है, जिसमें क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग शामिल हैं। डिमांड ड्राफ्ट, पोस्टल ऑर्डर, मनी ऑर्डर या नकद भुगतान स्वीकार नहीं किया जाता।

छात्रों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आवेदन केवल तय समय सीमा के भीतर ही किया जा सकता है। निर्धारित तारीख के बाद या ऑफलाइन भेजे गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाते। यदि आवेदन अधूरा हो या फीस जमा न की गई हो, तो उसे बिना किसी सूचना के खारिज कर दिया जाता है।

## 2. मार्क्स वेरिफिकेशन

उत्तर पुस्तिका की कॉपी देखने के बाद अगर छात्र को लगता है कि कॉपी जांच में कोई तकनीकी गलती हुई है, तो वह **वेरिफिकेशन ऑफ मार्क्स** के लिए आवेदन कर सकता है। इस प्रक्रिया में बोर्ड यह जांच करता है कि:

* सभी प्रश्नों को सही तरीके से जांचा गया या नहीं
* किसी उत्तर को गलती से बिना जांचे छोड़ा तो नहीं गया
* टोटलिंग में कोई गलती तो नहीं हुई

अगर इन जांचों के दौरान कोई गलती मिलती है तो उसे ठीक किया जाता है और छात्र के अंकों में बदलाव किया जा सकता है।

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## 3. री-इवैल्यूएशन या री-चेकिंग

मार्क्स वेरिफिकेशन के बाद छात्र **री-इवैल्यूएशन** के लिए आवेदन कर सकता है। यह प्रक्रिया केवल **थ्योरी भाग** के लिए ही लागू होती है। इसके लिए छात्रों को **₹100 प्रति प्रश्न** फीस देनी होती है।

री-इवैल्यूएशन के दौरान छात्र को उस प्रश्न का चयन करना होता है जिसे वह दोबारा जांच करवाना चाहता है। आवेदन करने से पहले छात्र संबंधित विषय की **मार्किंग स्कीम** देख सकते हैं, जो बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध होती है। इसके आधार पर छात्र उचित कारण के साथ री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

री-इवैल्यूएशन का परिणाम उसी ऑनलाइन अकाउंट में जारी किया जाता है, जिससे छात्र ने आवेदन किया था।

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## क्या री-चेकिंग के बाद नंबर बढ़ना तय है?

बहुत से छात्रों और अभिभावकों को लगता है कि अगर वे री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करते हैं तो उनके अंक बढ़ ही जाएंगे। हालांकि सीबीएसई बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक **डॉ. संयम भारद्वाज** ने इस धारणा को गलत बताया है।

उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि री-चेकिंग के बाद अंक बढ़ें ही। कई मामलों में अंक बढ़ सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में अंक कम भी हो सकते हैं। यह पूरी तरह से छात्र की उत्तर पुस्तिका और दिए गए उत्तरों पर निर्भर करता है।

## री-इवैल्यूएशन के बाद कौन-से अंक मान्य होंगे?

सीबीएसई के नियमों के अनुसार री-इवैल्यूएशन के बाद जो भी अंतिम अंक तय किए जाते हैं, वही मान्य होते हैं। कई बार ऐसा देखा गया है कि अगर अंक कम हो जाते हैं तो अभिभावक पुराने अंक ही रखने की मांग करते हैं, लेकिन बोर्ड के नियमों में इसकी अनुमति नहीं है।

इसका मतलब यह है कि री-इवैल्यूएशन के बाद **अंक बढ़ें या कम हों, वही अंतिम माने जाएंगे**। अगर अंकों में बदलाव होता है तो छात्र को अपनी पुरानी मार्कशीट जमा करनी होती है और उसके बाद बोर्ड नई मार्कशीट जारी करता है।

इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने से पहले छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका और मार्किंग स्कीम को ध्यान से देख लेना चाहिए, ताकि वे सोच-समझकर फैसला कर सकें।

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