जोधपुर । आशा सहयोगिनी संघ ने सोमवार को अपनी लंबे समय से लंबित प्रमुख मांगों को लेकर राज्यमंत्री के.के. विश्नोई से मुलाकात की और 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ब्लॉक अध्यक्ष धापू विश्नोई के नेतृत्व में संघ ने राज्य सरकार से कई अहम मांगें की, जिनमें आशा सहयोगिनियों को स्थायी राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, उचित पारिश्रमिक और अन्य लाभों की मांग शामिल है।
कोषाध्यक्ष रडोद प्रेमी चौधरी और उपाध्यक्ष भगवती मेहरा ने बताया कि संघ ने राज्य सरकार से आशा सहयोगिनियों के लिए नियमितीकरण, न्यूनतम मानदेय 18 हजार रुपये प्रति माह, प्रोत्साहन राशि की जगह निश्चित वेतन, भविष्य निधि, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ देने की मांग की।
सन्तोष नायल और गोमी कुड़िया ने यह भी कहा कि महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता और सुपरवाइजर भर्ती में वरीयता दी जाए और ऑनलाइन कार्यों के लिए आवश्यक तकनीकी संसाधन मुहैया कराए जाएं। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि कई बार महीनों तक मानदेय का भुगतान नहीं होता, जिससे आशा सहयोगिनियों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।
संघ ने मानदेय समय पर देने, पदोन्नति और वेतन वृद्धि की व्यवस्था, और आशा कैडर के सुपरवाइजर पदों को स्थायी करने की भी मांग की। इस ज्ञापन के दौरान बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनी मौजूद थीं, जिनमें कांता नवल, मंजू चौधरी, सरोज चोयल, मधु देवासी, सलमा शेखनगर, संजुलता मेघवाल, सेठु गोदारा, संतोष खुड़खुड़िया, सुआ गोदारा, बेबी चोटिया और अन्य सदस्य शामिल थे।
ज्ञापन को लेकर आशा सहयोगिनियों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे और भी कठोर कदम उठाने पर मजबूर हो सकती हैं।


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