कोटकासिम। कोटकासिम में आयोजित एक विशाल हिंदू सम्मेलन में हिंदू जागरण, स्वदेशी विचारधारा और कुटुंबन (परिवार केंद्रित जीवन) को लेकर विशेष रूप से जोर दिया गया। संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित इस सम्मेलन में साहित्य एवं पंच परिवर्तन पर आधारित एक आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने उपस्थित जनसमूह का ध्यान आकर्षित किया।
सम्मेलन में विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, मातृशक्ति, युवा, बुजुर्ग और बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रमुख संतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें सीताराम तिगावा महाराज, तपस्य गिरी महाराज, भास्कर मननदीप, गोसेवक आचार्य विजय सेवक, ब्रह्म प्रजापति और ईश्वरीय विश्वविद्यालय की संचालक रेखा दीदी शामिल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता धनीराम सैनी ने की।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित अक्षय (विभाग प्रचारक) ने परिवार व्यवस्था, सामाजिक समरसता और परिवार में संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा, “मजबूत परिवार व्यवस्था ही सशक्त समाज की नींव है और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए संस्कारों का संचार अत्यंत आवश्यक है।”
सम्मेलन के दौरान उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं और प्रतिभागियों ने समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और भारतीय संस्कृति को सशक्त करने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और स्वदेशी मूल्यों को मजबूत करने का एक स्पष्ट संदेश दिया।


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