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पश्चिम एशिया में 2 हफ्ते का युद्धविराम, दुनिया को राहत; फिर भी नेतन्याहू अपने रुख पर कायम

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पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से जारी संघर्ष के बीच बुधवार का दिन दुनिया के लिए बड़ी राहत लेकर आया। अमेरिका, इजरायल और ईरान दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। लंबे समय से चल रहे इस सैन्य तनाव के बीच यह फैसला वैश्विक स्तर पर शांति की उम्मीद जगाने वाला माना जा रहा है। हालांकि, तीनों पक्षों ने इस युद्धविराम को अपनी-अपनी जीत के रूप में पेश किया है, जिससे साफ है कि जमीनी स्तर पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी निर्धारित समयसीमा समाप्त होने से करीब 90 मिनट पहले युद्धविराम की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह सहमति पाकिस्तान के प्रस्ताव के बाद बनी है। दूसरी ओर, ईरान ने युद्धविराम के लिए 10 कड़ी शर्तें रखी थीं, जिन पर अमेरिका ने विचार करने की बात कही है। इजरायल ने भी युद्धविराम को स्वीकार किया, लेकिन इसके बावजूद उसने लेबनान में हमले जारी रखे, जिससे हालात और जटिल हो गए।

इस बीच, पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता की तैयारी भी चल रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद आने का निमंत्रण दिया है। हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया है कि अभी आमने-सामने बातचीत को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

युद्धविराम की खबर से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक असर देखने को मिला। भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाजारों में तेजी आई, जबकि कच्चे तेल की कीमतें गिरकर लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्धविराम स्थायी शांति में बदलता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा हो सकता है।

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ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान मिलकर जमीन में दबे संवर्धित यूरेनियम को निकालने और हटाने पर काम करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि ईरान पर लगे टैरिफ और प्रतिबंधों में राहत देने पर भी बातचीत जारी है। हालांकि, ईरान की शर्तों में परमाणु संवर्धन के अधिकार को मान्यता देने जैसे मुद्दों पर अब भी स्पष्टता नहीं है।

उधर, युद्धविराम के बावजूद इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। बेरुत में हुए धमाकों से अफरा-तफरी मच गई। इजरायल के रक्षा मंत्री ने दावा किया कि यह हिजबुल्लाह के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन था। इसके बाद ईरान ने चेतावनी दी कि अगर लेबनान पर हमले नहीं रुके तो वह युद्धविराम से हट सकता है।

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ईरान की शर्तों में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना शामिल है, जिसमें हिजबुल्लाह जैसे समूहों से जुड़े संघर्ष भी आते हैं। इसी बीच खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों की भी सूचना दी। अबू धाबी में एक गैस संयंत्र में आग लगने की घटना ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया।

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