नेपाल सरकार ने भारतीय सामानों पर लगाए गए टैक्स को लेकर बड़ा यू-टर्न लिया है। भारी विरोध और जनता के दबाव के बाद सरकार ने इस फैसले को वापस ले लिया, जिससे भारत-नेपाल सीमा पर रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है।

क्या था पूरा मामला?
दरअसल, अप्रैल 2026 के मध्य में नेपाली नव वर्ष के बाद सरकार ने एक पुराने कस्टम नियम को सख्ती से लागू करना शुरू किया था। इस नियम के तहत भारत से लाए गए 100 नेपाली रुपये से अधिक कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य कर दी गई थी।
सामान की श्रेणी के अनुसार यह ड्यूटी 80% तक हो सकती थी, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा था।
सख्ती से लागू किए गए नियम
सरकार ने इन नियमों का कड़ाई से पालन करवाना शुरू किया। सीमा चौकियों पर कस्टम अधिकारियों द्वारा छोटे-छोटे सामान की भी जांच की जा रही थी।
सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए, जिनमें आलू के चिप्स जैसे सामान्य सामान को भी जब्त करते हुए देखा गया। इससे आम जनता में नाराजगी तेजी से बढ़ने लगी।
जनता का विरोध और असर

इस फैसले के खिलाफ लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इसे “बिना घोषणा की गई नाकेबंदी” बताया और कहा कि इससे रोजमर्रा की जिंदगी, धार्मिक कार्यों और खेती-बाड़ी पर असर पड़ रहा है।
खासतौर पर सीमा से लगे इलाकों में रहने वाले लोग, जो दैनिक जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर हैं, इस नियम से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
सरकार को लेना पड़ा फैसला वापस
लगातार विरोध और दबाव के बाद नेपाल सरकार को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा। इस फैसले से अब सीमा पर व्यापार और आवाजाही पहले की तरह सुचारू होने की उम्मीद है।
भारत-नेपाल खुली सीमा की खासियत
भारत और नेपाल के बीच दशकों पुरानी खुली सीमा व्यवस्था दुनिया की अनोखी व्यवस्थाओं में से एक है। इसके तहत दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा या पासपोर्ट के एक-दूसरे के देश में आ-जा सकते हैं।
इस फैसले से इस पारंपरिक व्यवस्था में आई रुकावट अब खत्म हो गई है।

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