ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत में LPG और LNG संकट गहराया। अब अंगोला की सोनांगोल से गैस सप्लाई के लिए भारतीय कंपनियों की बातचीत शुरू

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान युद्ध के चलते भारत में रसोई गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से गैस सप्लाई लगभग ठप हो गई है, जिससे देश में गैस संकट गहरा गया है।
इस संकट से निपटने के लिए भारत की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां अब नए विकल्प तलाश रही हैं। सूत्रों के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और गेल (GAIL) अफ्रीकी देश अंगोला की सरकारी कंपनी सोनांगोल (Sonangol) के साथ LPG और LNG सप्लाई को लेकर प्रारंभिक बातचीत कर रही हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ा संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग है। इसके बंद होने से भारत का लगभग 90% LPG आयात प्रभावित हुआ है। इसके चलते देश में गैस की भारी कमी देखने को मिल रही है।
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है। अब शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के अंतराल पर ही LPG सिलेंडर की बुकिंग की जा सकेगी।
इस बीच, कतर के रास लफान (Ras Laffan) औद्योगिक क्षेत्र पर हमलों के बाद कतरएनर्जी ने ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दिया है। इसके चलते पेट्रोनेट LNG ने भी अपने ग्राहकों के लिए आपूर्ति संबंधी प्रतिबंध लागू किए हैं।
अंगोला से गैस आयात की तैयारी
अफ्रीकी देश अंगोला पहले से भारत को कच्चा तेल और LNG सप्लाई करता रहा है, लेकिन अगर यह नया समझौता होता है, तो यह पहली बार होगा जब भारत अंगोला से LPG आयात करेगा।

भारतीय कंपनियां हाजिर बाजार पर निर्भर रहने के बजाय अंगोला के साथ दीर्घकालिक समझौते करना चाहती हैं। प्रस्तावित योजना के तहत LPG के लिए 1 साल और LNG के लिए कम से कम 10 साल का अनुबंध किया जा सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह डील?
अगर अंगोला के साथ यह समझौता सफल होता है, तो यह भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम होगा। इससे न केवल मौजूदा संकट से राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में भी गैस आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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