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Strait of Hormuz Crisis: क्या फिर शुरू होगा ‘टैंकर वॉर’? समुद्र में बढ़ा खतरा

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजर एक बार फिर Strait of Hormuz पर टिक गई है। यह संकीर्ण समुद्री मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है, और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञों को 1980 के दशक का कुख्यात ‘टैंकर वॉर’ फिर से लौटता नजर आ रहा है।

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अमेरिका की तैयारी, बढ़ी चिंता

रिपोर्ट्स के अनुसार, United States के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए नौसेना तैनात करने पर विचार कर रहे हैं। यह कदम संकेत देता है कि क्षेत्र में हालात तेजी से गंभीर हो रहे हैं।

अगर अमेरिकी नौसेना इस क्षेत्र में सक्रिय होती है, तो इससे तनाव और बढ़ सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर Iran के साथ टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है।

1980 के दशक का ‘टैंकर वॉर’ क्या था?

आज की स्थिति को समझने के लिए इतिहास पर नजर डालना जरूरी है। ‘टैंकर वॉर’ की शुरुआत Iran-Iraq War के दौरान हुई थी।

साल 1980 में Saddam Hussein ने ईरान पर हमला किया।

शुरुआती लड़ाई के बाद 1984 तक युद्ध ठहराव की स्थिति में पहुंच गया।

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इसके बाद इराक ने रणनीति बदलते हुए ईरान के तेल टैंकरों और तेल ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

इसका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना था। जवाब में ईरान ने उन जहाजों पर हमला करना शुरू कर दिया, जो इराक को समर्थन दे रहे थे। यही संघर्ष आगे चलकर ‘टैंकर वॉर’ के रूप में सामने आया।

समुद्र में बढ़ा खतरा

उस दौर में खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले कई तेल टैंकरों पर हमले हुए, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर गंभीर असर पड़ा। अमेरिका को भी अपने सहयोगी देशों के जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना तैनात करनी पड़ी थी।

आज फिर से हालात उसी दिशा में बढ़ते नजर आ रहे हैं। अगर टैंकरों पर हमले शुरू होते हैं, तो वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है और कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

ईरान और क्षेत्रीय तनाव का असर

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मौजूदा समय में Iran और उसके विरोधी देशों के बीच बढ़ता तनाव इस संकट को और गहरा बना रहा है। क्षेत्र में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर और समुद्री मार्गों पर खतरा लगातार बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह संघर्ष एक बड़े समुद्री युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

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वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

Strait of Hormuz से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस सप्लाई करता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव या युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका दे सकता है।

  • तेल की कीमतों में तेजी
  • सप्लाई चेन में बाधा
  • महंगाई में बढ़ोतरी

ये सभी संभावित प्रभाव हैं, जो इस संकट के गहराने पर सामने आ सकते हैं।

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