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60 वर्षों का इंतज़ार टूटा – ग्रामीण सेवा शिविर बना सहमति और समाधान का सेतु

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जोधपुर। हुणगांव कला की वह सुबह मानो कुछ अलग ही थी। पंचायत भवन के आँगन में ग्रामीण सेवा शिविर का सादा-सा मंच सजा था, लेकिन माहौल में एक अनकही उम्मीद तैर रही थी। दशकों से उलझे विवाद, पीढ़ियों से चले आ रहे तनाव और लगातार अधूरे रह गए सपने उस रोज़ जैसे अपने समाधान की ओर बढ़ रहे थे।

गांव के बुज़ुर्ग ओगड़ाम पुत्र अनाराम और उनके साथ 15 खातेदारों की आँखों में बरसों की बेचैनी साफ झलक रही थी। लगभग 60 वर्षों से 8 खसरों की 88 बीघा कृषि भूमि के बंटवारे की मांग गाँव की चौपाल से लेकर राजस्व दफ्तर तक गूँजती रही थी। मगर हर बार विवाद, असहमति और टकराव इसकी राह रोक लेते थे।

शुक्रवार को आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर ने इस अधूरी कहानी का अंत लिख दिया। प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में सभी खातेदार एक ही छत के नीचे बैठे। माहौल में पहले झिझक थी, लेकिन संवाद शुरू हुआ और धीरे-धीरे वर्षों की दीवारें ढहने लगीं। आखिरकार सहमति बनी और 88 बीघा भूमि का विधिवत बंटवारा कर दिया गया।

जैसे ही यह निर्णय हुआ, सभी खातेदारों के चेहरों पर राहत की मुस्कान खिल उठी। किसी ने वर्षों की थकान को आँसुओं से बहाया, तो किसी ने बच्चों की तरह खिलखिलाकर खुशी जताई। यह सिर्फ भूमि का बंटवारा नहीं था, बल्कि एक बोझिल इतिहास से मुक्ति और नई शुरुआत की दस्तक थी।

खातेदारों ने एक स्वर में कहा – “आज मानो हमारी पीढ़ियों का सपना पूरा हो गया। अब हम अपनी भूमि पर स्वतंत्र रूप से खेती कर पाएंगे। इसके लिए हम मुख्यमंत्री और राजस्व विभाग के ऋणी हैं।”

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