बिहार में एक बार फिर नाम बदलने की राजनीति ने जोर पकड़ लिया है। राज्य सरकार द्वारा कई संस्थानों से दिवंगत कांग्रेस नेता संजय गांधी का नाम हटाने के फैसले ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो सकता है।

किन संस्थानों के बदले गए नाम?
- राज्य के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत आने वाले
- संजय गांधी जैविक उद्यान, पटना
- संजय गांधी जैविक उद्यान एवं विकास सोसाइटी, पटना
- इन दोनों संस्थानों के नाम से संजय गांधी का नाम हटा दिया गया है, जबकि बाकी नाम यथावत रखे गए हैं।
- इसके अलावा डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत आने वाले
- संजय गांधी गव्य प्रावैद्यिकी संस्थान, पटना
का नाम बदलकर अब बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, पटना कर दिया गया है।
राजनीतिक मायने क्या हैं?
दिलचस्प बात यह है कि जिन विभागों के तहत ये संस्थान आते हैं, वे लंबे समय से भाजपा कोटे के मंत्रियों के पास रहे हैं। ऐसे में इस फैसले को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आने वाले समय में बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बन सकता है।
आगे और नाम बदलने की तैयारी?
सूत्रों के मुताबिक, सरकार सुल्तानगंज का नाम बदलकर अजगैबीनाथ करने पर विचार कर सकती है। इसके अलावा बख्तियारपुर सहित कई अन्य शहरों के नाम बदलने की मांग भी लंबे समय से उठती रही है।

यदि इन प्रस्तावों पर अमल होता है, तो राज्य में नाम बदलने का सिलसिला और तेज हो सकता है।
नीतीश कुमार का रुख
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का रुख इस मामले में अलग रहा है। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई कांग्रेस नेताओं को सम्मान दिया।
उदाहरण के तौर पर, बेली रोड का नाम बदलकर जवाहर लाल नेहरू पथ (नेहरू पथ) किया गया। हालांकि, बख्तियारपुर का नाम बदलने के प्रस्ताव को उन्होंने कई बार टाल दिया।
इसके अलावा गया का नाम गयाजी और रघुनाथपुर का नाम ब्रह्मेश्वर नाथ करने जैसे कुछ सीमित बदलाव ही किए गए।

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