जोधपुर जिले के छोटे से गांव बिराई की मिट्टी से निकली एक संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां के किसान सुखराम, जो अपनी पत्नी समु देवी के साथ मेहनत-मजदूरी और खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे, आर्थिक तंगी और पानी की भारी कमी से जूझ रहे थे। गांव में भूजल स्तर लगातार गिरने से खेती संकट में आ गई और परिवार की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ने लगा।

ऐसे हालात में सुखराम ने हार नहीं मानी और परिवार को लेकर फलौदी क्षेत्र में चौथाई (बटाई) पर खेती शुरू की। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे सुनील की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। सुनील ने विश्वकर्मा स्कूल लॉर्डिया से सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी शिक्षा पूरी की।
पिता का सपना था कि उनका बेटा बड़ा अधिकारी बने। इस सपने को साकार करने के लिए सुखराम दिन-रात खेतों में पसीना बहाते रहे और सुनील की पढ़ाई के लिए हर संभव संसाधन जुटाते रहे। माता-पिता के संघर्ष को देखकर सुनील ने भी ठान लिया कि वह प्रशासनिक सेवा में जाकर उनका नाम रोशन करेगा।

सुनील ने जोधपुर शहर में रहकर स्नातक के साथ-साथ राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) की तैयारी शुरू की। कड़ी मेहनत और लगन के बल पर सबसे पहले उनका चयन पटवारी पद पर हुआ और वर्तमान में वे अजमेर स्थित राजस्व मंडल में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
इसके बाद 2024 में घोषित RAS परीक्षा परिणाम में सुनील भाटी ने अपने पहले ही प्रयास में 1550वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया। बिराई गांव से पहले RAS अधिकारी बनने पर पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और बधाई देने वालों का तांता लग गया।
पीआरपी न्यूज से बातचीत में सुनील ने कहा, “अगर आपके इरादे नेक हों और आप लगातार मेहनत करें, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। सफलता का एक ही मंत्र है—लगातार प्रयास और कठोर परिश्रम।”

सुनील भाटी की यह कहानी न केवल युवाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के सामने हार जाती हैं।

Leave a Reply