जोधपुर। जनगणना 2027 के प्रथम चरण—मकान सूचीकरण एवं मकान गणना—के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिले में फील्ड ट्रेनर्स के दूसरे बैच का तीन दिवसीय प्रशिक्षण जारी है। शुक्रवार को प्रशिक्षण के दूसरे दिन प्रमुख जनगणना अधिकारी एवं जिला कलक्टर आलोक रंजन ने राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यशाला का निरीक्षण कर प्रशिक्षणार्थियों से संवाद किया।

इस दौरान उप जिला जनगणना अधिकारी एवं संयुक्त निदेशक (आर्थिक एवं सांख्यिकी) मीनाक्षी चौधरी और जिला समन्वयक सुरेश चंद मीणा भी मौजूद रहे।
जिला कलक्टर आलोक रंजन ने कहा कि जनगणना 2027 देश की पहली पूर्णतः डिजिटल और पेपरलेस जनगणना होगी। इसके लिए फील्ड स्टाफ को तकनीकी रूप से दक्ष बनाया जा रहा है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सके।
संवाद के दौरान उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों की तैयारी और विषय की समझ की सराहना करते हुए इसे सफल जनगणना का सकारात्मक संकेत बताया।
उन्होंने जानकारी दी कि 1 मई से 15 मई 2026 तक नागरिकों के लिए स्वगणना सुविधा उपलब्ध रहेगी। लोग census.gov.in पोर्टल पर जाकर अपने मोबाइल से बिना किसी जटिल प्रक्रिया के अपने मकान का विवरण स्वयं दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद एक यूनिक आईडी जारी होगी, जिससे आगे की गणना प्रक्रिया आसान हो जाएगी।

इसके बाद 16 मई से 14 जून 2026 तक प्रगणक घर-घर जाकर मोबाइल एप के माध्यम से आंकड़े एकत्रित करेंगे। पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होगी, जिससे पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होगी।
जिला कलक्टर ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन निष्ठा, ईमानदारी और अनुशासन के साथ करें, ताकि जनगणना कार्य त्रुटिरहित तरीके से पूरा हो सके। साथ ही आमजन को भी इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।
उप जिला जनगणना अधिकारी मीनाक्षी चौधरी ने बताया कि प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को तकनीकी, कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। अंतिम दिन समूह चर्चा और फील्ड अभ्यास भी आयोजित किया जाएगा।
इस प्रशिक्षण में जोधपुर जिले के विभिन्न चार्ज क्षेत्रों—चामू, लूणी, डांवर बिलाड़ा, भोपालगढ़, बावड़ी, बालेसर, मथानियां और पीपाड़ शहर—के कुल 37 फील्ड ट्रेनर्स भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण जनगणना निदेशालय, जयपुर और जिला स्तर के मास्टर ट्रेनर्स द्वारा दिया जा रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान जनगणना परिचय, कानूनी प्रावधान, डिजिटल प्रक्रियाएं, एचएलबी सीमाएं और ले-आउट मानचित्र जैसे प्रमुख विषयों पर गहन जानकारी दी जा रही है, ताकि फील्ड स्तर पर कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

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