राजस्थान में “वन स्टेट-वन इलेक्शन” की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। राज्य सरकार का फोकस अब पंचायतीराज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने पर है।
दरअसल, प्रदेश में सभी नगरीय निकायों का कार्यकाल पहले ही पूरा हो चुका है। ऐसे में अब सरकार पंचायत चुनावों के कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए एकसाथ चुनाव कराने की रणनीति पर काम कर रही है।
📊 कार्यकाल का गणित समझें:
- 10 जिला परिषद और 108 पंचायत समितियां: इनका कार्यकाल पूरा होने के बाद ही संयुक्त चुनाव संभव होंगे।
- 6 जिला परिषद और 78 पंचायत समितियां: इनका कार्यकाल अगस्त-सितंबर 2026 में समाप्त होगा।
- 4 जिला परिषद और 30 पंचायत समितियां: इनका कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म होगा।
यानी, सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि सभी संस्थाओं का कार्यकाल पूरा होते ही एक साथ चुनाव करवाए जाएं, ताकि प्रशासनिक खर्च कम हो और चुनाव प्रक्रिया अधिक प्रभावी बने।
🏛️ क्या है सरकार की योजना?
सरकार चाहती है कि पंचायतीराज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनाव एक ही समय पर कराए जाएं। इससे न केवल संसाधनों की बचत होगी, बल्कि बार-बार लगने वाली आचार संहिता से विकास कार्यों में आने वाली रुकावट भी कम होगी।
⚖️ क्यों अहम है ये फैसला?
- चुनावी खर्च में कमी
- प्रशासनिक मशीनरी पर कम दबाव
- विकास कार्यों में निरंतरता
- वोटिंग प्रतिशत बढ़ने की संभावना
📝 निष्कर्ष:
अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो राजस्थान में साल के अंत तक “वन स्टेट-वन इलेक्शन” का मॉडल लागू हो सकता है, जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।


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