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बुचेटी धाम में शिव महापुराण कथा: माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म – कैलाश गिरी महाराज

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जोधपुर। जय अम्बे माँ मंदिर, बुचेटी धाम में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित शिव महापुराण कथा के सातवें दिन भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और वातावरण “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा।

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📖 गणेश जी के प्रथम पूजन का रहस्य

व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए महाराज कैलाश गिरी ने भगवान गणेश के ‘प्रथम पूज्य’ होने का प्रसंग अत्यंत भावपूर्ण तरीके से सुनाया। उन्होंने बताया कि जब भगवान गणेश और कार्तिकेय के बीच पृथ्वी की परिक्रमा करने की प्रतिस्पर्धा हुई, तब कार्तिकेय अपने वाहन से निकल पड़े, जबकि गणेश जी ने माता-पिता—भगवान शिव और माता पार्वती—की परिक्रमा कर यह सिद्ध किया कि माता-पिता ही संपूर्ण ब्रह्मांड के समान हैं। उनकी सेवा ही सबसे बड़ा धर्म और तीर्थ है। इसी कारण उन्हें प्रथम पूजनीय होने का वरदान मिला।

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🙏 संस्कारों और परिवार मूल्यों पर जोर

महाराज  ने अपने प्रवचन में कहा कि आधुनिक युग में युवा पीढ़ी अपने संस्कारों और माता-पिता के महत्व को भूलती जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस घर में माता-पिता प्रसन्न रहते हैं, वहाँ स्वयं ईश्वर का वास होता है। इस भावपूर्ण संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को छू लिया और कई लोग भावुक हो उठे।

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🌼 श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था

कथा के सातवें दिन भी संत रामदेव  और मंदिर के पुजारी चेतन राम  भाटी की गरिमामयी उपस्थिति रही। आसपास के गांवों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में महाआरती हुई और प्रसाद वितरण के साथ आयोजन संपन्न हुआ।

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