पुलिस एवं रक्षा सेवाओं की तैयारी के अनुकूल पाठ्यक्रम विकसित हों, विश्वविद्यालय राष्ट्र निर्माण का वैचारिक केंद्र बने: राज्यपाल
जोधपुर। राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने शुक्रवार को सरदार पटेल पुलिस, सुरक्षा एवं आपराधिक न्याय विश्वविद्यालय की विस्तृत समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति, परिणामोन्मुख अनुसंधान, परीक्षा प्रणाली, नई शिक्षा नीति (एनईपी) के क्रियान्वयन, सामुदायिक सेवाओं और छात्र कल्याण से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
बैठक में कुलगुरु डॉ. आलोक त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों, प्रवेश की स्थिति, एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, परीक्षा सुधार, अनुसंधान परियोजनाओं और सामुदायिक सहभागिता गतिविधियों के बारे में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय की वर्तमान चुनौतियों और भावी योजनाओं के बारे में भी राज्यपाल को जानकारी दी।
राज्यपाल बागडे ने विश्वविद्यालय को निर्देशित किया कि वह दीर्घकालीन कार्ययोजना तैयार करें, ताकि शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों को सुव्यवस्थित और परिणामोन्मुखी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण मॉड्यूल इस प्रकार डिज़ाइन किए जाएं, ताकि विद्यार्थियों को पुलिस और रक्षा सेवाओं की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में प्रत्यक्ष लाभ हो सके।
इसके अलावा, राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को सुदृढ़ करने के लिए एजी ऑडिट की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर उच्चस्तरीय अध्ययन और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक माह प्रतिष्ठित विद्वानों को आमंत्रित कर ज्ञान-सहभागिता कार्यक्रम आयोजित करने का भी सुझाव दिया।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय को राष्ट्र निर्माण का एक वैचारिक केंद्र बनाना चाहिए, जहां से अनुशासित, राष्ट्रनिष्ठ और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण नेतृत्व तैयार हो। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अनुसंधान का समन्वय कर विद्यार्थियों का संतुलित विकास किया जाए।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों के बौद्धिक और शारीरिक विकास को समान महत्व देने की बात करते हुए, शिक्षा के साथ-साथ खेल, व्यायाम, नेतृत्व प्रशिक्षण और व्यवहारिक अभ्यास को भी शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने का निर्देश दिया। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण के लिए हर साल वृक्षारोपण अभियान चलाने और पौधों के संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय से अपेक्षाएँ व्यक्त की कि वह उत्कृष्ट शिक्षण-प्रशिक्षण, प्रभावी शोध तंत्र, अनुशासित प्रशासनिक व्यवस्था और बहुआयामी छात्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे, ताकि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सके।
बैठक में पुलिस आयुक्त ओमप्रकाश सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।


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