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मार तो कोई भी सकता है, लेकिन तारने वाला चाहिए: संत कृपाराम महाराज

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बावड़ी। गंगाणी के मातराणी भटियाणी मंदिर में बुधवार को संत कृपाराम महाराज द्वारा संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। इस कथा के पांचवें दिन ताड़का वध के प्रसंग पर विशेष प्रकाश डाला गया। कथावाचक संत कृपाराम महाराज ने कहा कि, “मार तो कोई भी सकता है, लेकिन तारने वाला चाहिए।” उनके अनुसार, यह वाक्य अधर्म का नाश करने और किसी के उद्धार के लिए ईश्वरीय कृपा की महत्वपूर्ण आवश्यकता को दर्शाता है। भगवान राम ही वह अद्वितीय शक्ति थे जो ताड़का जैसे राक्षसों का वध करने के साथ-साथ उनका उद्धार भी कर सकते थे।

कथा में महाराज ने यह स्पष्ट किया कि राम का अवतार केवल शारीरिक नाश के लिए नहीं था, बल्कि वे दुष्टों को उनके कर्मों के अनुसार मोक्ष देने के लिए आए थे। ताड़का का वध होते ही उसके राक्षसी रूप का नाश हुआ और वह अपनी दिव्य यक्षिणी रूप में स्वर्ग चली गई, जो उसके उद्धार का प्रतीक था।

कथा के दौरान महाराज ने भगवान राम के जीवन के अन्य पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार राक्षसी शासन से त्रस्त लोग प्रभु राम की मदद के लिए मुक्ति की खोज में थे। जब मुनियों ने भगवान राम से सहायता की प्रार्थना की, तब श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण के साथ मुनि विश्वामित्र की मदद के लिए गए और ताड़का जैसे राक्षसों का वध कर जनकल्याण किया।

कथा के अंत में प्रभु की पावन आरती का आयोजन हुआ और भव्य राम कथा का समापन हुआ। इस अवसर पर कामख्या धाम के उपासक अघोरी बाबा शैलेन्द्र बाबा, पूर्व उप जिला प्रमुख हीरालाल मुंडेल, पूर्व उप प्रधान एवं भाजपा जिला उपाध्यक्ष प्रेमलता प्रजापत, भाजपा नेता कोजाराम भाटी, माली समाज अध्यक्ष जियाराम तंवर, छात्र नेता नंदिता चौधरी, कानाराम थोरी सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे।

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