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शासन नहीं, सेवा का संकल्प: रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर श्रद्धा और रामराज्य की अनुभूति

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टपूकड़ा। अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ देशभर में श्रद्धा, सेवा और संकल्प के भाव से मनाई गई। इस अवसर पर टपूकड़ा क्षेत्र के नौला धाम मंदिर में एक विशेष धार्मिक आयोजन आयोजित किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने का संदेश दिया। समाजसेवी और भारतीय जनता पार्टी के नेता, टीटू गर्ग ने भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर विधिवत पूजन किया और प्रसाद वितरण किया।

इस आयोजन में मंदिर कमेटी अध्यक्ष घनश्याम मित्तल, चंद्रभान यादव, पंकज यादव, कृष्णा, सोनू सहित मंदिर के पुजारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन स्थल भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच पूरी तरह से भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ था।

राम मंदिर: सेवा का प्रतीक
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसे विचार की पुनर्स्थापना है, जहां शासन का मुख्य उद्देश्य सेवा है। वे बोले कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ जिस भावना का उदय हुआ था, वह अब केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि करुणा, कर्तव्य और जनकल्याण का भी प्रतीक बन चुका है।

इस दो वर्षों के कालखंड में देश ने देखा कि सेवा भाव कितनी गहराई से जमीन पर उतरा है। चाहे वह राशन वितरण हो, इलाज की सुविधा हो, पक्के मकान हों, या फिर स्वच्छ पेयजल की सुविधाएं, हर जगह रामराज्य के आदर्शों का पालन किया गया। वक्ताओं ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के निर्णयों ने केवल सुविधाओं का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि आमजन में आत्मविश्वास और राष्ट्र गौरव की भावना को भी सुदृढ़ किया है।

रामराज्य का संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर, सभी श्रद्धालुओं ने रामराज्य की सच्ची परिकल्पना को अपनाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि रामराज्य का असली रूप तब सामने आएगा, जब शासन का मुख्य उद्देश्य केवल सेवा हो और हर नागरिक का सर्वांगीण उत्थान सुनिश्चित किया जाए।

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