बावड़ी। नांदिया कलां गाँव में काजरी स्थित भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित परियोजना “मरुस्थलीकरण नियंत्रण पर्यावरण सूचना, जागरूकता, क्षमता निर्माण और आजीविका कार्यक्रम” (ईआईएसीपी) के तहत एक सामूहिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में गाँव की महिला शक्ति और बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत गाँव में स्थित तालाब के पास सफाई अभियान से हुई, जिसमें पीपल, बेर, थार शोभा खेजडी, और आंवला जैसे पौधों का रोपण किया गया। इसके बाद स्वच्छता रैल्ली का आयोजन किया गया, जिसे काजरी के प्राकृतिक संसाधन प्रभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियब्रत सांतरा ने रवाना किया। रैल्ली के बाद पर्यावरण से संबंधित व्याख्यान माला का आयोजन किया गया, जिसमें ईआईएसीपी के प्रभारी डॉ. पी. सी. महाराणा ने कार्यक्रम और परियोजना की विस्तृत जानकारी दी।
व्याख्यान माला में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपेश माचिवाल ने जल संरक्षण और जल प्रबंधन पर अपने विचार साझा किए, जबकि ईआईएसीपी के सदस्य डॉ. विपिन चोधरी ने खेतों में चूहों से होने वाले नुकसान से बचाव के उपायों पर चर्चा की। गाँव के सरपंच जसवंत सिंह भाटी ने काजरी से आए सभी वैज्ञानिकों और अधिकारियों को पर्यावरण एवं कृषि से संबंधित जानकारी देने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया और भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन के लिए आमंत्रित किया।
कार्यक्रम के अंत में बसंती, सुगन कँवर, सुरता देवी, नाहर सिंह, और मोहन राम को पर्यावरण और स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर सम्मानित किया गया। डॉ. प्रियब्रत सांतरा ने सभी आगंतुकों को औषधीय पौधों और फल वाटिका लगाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पूनम कलश, प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. मयूर भाटी, सोनाली और अविनाश खत्री ने किया।


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