बावड़ी । करे कोई और बदनाम कोई संगठन हो रहा है। नट भी अजीब खेल दिखाते है। अपने बच्चो का नाम रखकर और करतबो से भी। ऐसा ही वाक्य भोपालगढ सर्किल के खेड़ापा पुलिस थाने का सामने आया है। जिसके बाद भोपालगढ़ डिप्टी भूराराम खिलेरी द्वारा लिखी जा रही चर्चित किताब किस्सों की क्यारी 2 में गजब का किस्सा सुनाया। डिप्टी खिलेरी ने बताया कि नट जाति के लोग थानेदार, तहसीलदार, एसपी,कलेक्टर, आईजी,पुलिसिया जैसे नाम लगाते है। जिससे कई बार पुलिस भी कन्फ्यूजन हो जाती है।
ऐसा ही वाकिया भी मुकदमा नम्बर 200/2025 पुलिस थाना खेड़ापा जोधपुर ग्रामीण में हुआ। कुछ पुरूष एवं कुछ औरते भागते हुए थाने में घुसी और चिल्लाने लगी कि पुलिसिया ने पकड़ो रे म्हारी छोरी लेयर भाग गया। आवाज सुन थानाधिकारी लाखराम जाखड़ व स्टॉफ उनको शांत करने का प्रयास कर रहे थे तब तक थाने के आसपास के लोग भी आ गये और बात करते कि पुलिस इन लोगो की छोरी लेकर भाग गये।
100 लोग मनोरंजन व तमाशाबीन बनकर थाने आ गये। तब थानाधिकारी लाखाराम जाखड़ ने उनको शांत करते हुए पूछा कि कौनसा पुलिस वाला तुम्हारी छोरी लेकर भाग गया ? नाम बताओ ? तो स्त्री पुरूषो ने कहा पुलिस वाले नही पुलिसिया लेकर भागा है। तो थानाधिकारी एवं दुकानदारों ने कहा कि उसी का नाम तो जानना चाह रहे है ? तब परिवादियो ने कहा साहब लड़की भगाने वाले का नाम ही पुलिसिया है और पुलिसिया के बाप का नाम एसपीड़ा है। तब जाकर थानाधिकारी ने राहत की सांस ली कि ये लोग पुलिसकर्मी के बारे में बात नही करके मुलजिम पुलिसिया पुत्र एसपीड़ा की बात कर रहे है। जब थानाधिकारी ने भगवैया का नाम पुछा तो बटकी बताया और कहा कि उसको भगाने में थानेदार भी शामील है। इस पर थानाधिकारी चौंका! तब पता चला कि पुलिसिया के दोस्त का नाम थानेदार है और उसके मामा के वहां छुपे हो सकते है उसका नाम डिप्टीड़ा है।
तब न केवल सब पुलिसकर्मी बल्कि दुकानदार भी हंसने लगे और थानाधिकारी ने राहत की सांस ली कि लाईन हाजिर होने से तो बचे।”गूंगा थारी सैन मे, समझत है नहीं कोय। समझै थारी मावड़ी, के समझै थारी जोय ।।”


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